Ayodhya/Alive News: अयोध्या के राम मंदिर चढ़ावा चोरी मामले को लेकर देशभर में चर्चा तेज है। इस मामले में गिरफ्तार आरोपियों की पैरवी को लेकर भी नया विवाद सामने आया है। खबरों के अनुसार, अयोध्या के फैजाबाद बार एसोसिएशन के कई वकीलों ने आरोपियों का केस नहीं लड़ने की इच्छा जताई है। हालांकि इस संबंध में अंतिम फैसला बार एसोसिएशन की आम सभा की बैठक में लिया जाएगा।
बार एसोसिएशन के अध्यक्ष कालिका मिश्रा ने बताया कि इस विषय पर सभी सदस्यों की राय के बाद ही कोई आधिकारिक निर्णय होगा। कई स्थानीय वकीलों का कहना है कि राम मंदिर में श्रद्धालुओं द्वारा चढ़ाए गए दान के कथित गबन से उनकी धार्मिक भावनाएं आहत हुई हैं।
राम मंदिर चढ़ावा चोरी मामले की जांच उत्तर प्रदेश पुलिस की विशेष जांच टीम (SIT) कर रही है। पुलिस ने इस मामले में आठ आरोपियों को गिरफ्तार किया है।
जांच एजेंसियों के अनुसार, कथित गबन से जुड़ी करीब 79.85 लाख रुपये की राशि बरामद की गई है। पुलिस ने आरोपियों के ठिकानों पर छापेमारी भी की है और उनके वित्तीय लेन-देन की जांच जारी है। दान की गिनती से जुड़े कर्मचारियों की भूमिका की भी जांच की जा रही है। सभी आरोपियों को अदालत में पेश करने के बाद न्यायिक हिरासत में भेज दिया गया है।
क्या हर आरोपी को वकील मिलने का अधिकार है?
भारतीय संविधान हर व्यक्ति को निष्पक्ष सुनवाई का अधिकार देता है। संविधान के अनुच्छेद 21 के तहत किसी भी आरोपी को न्यायपूर्ण प्रक्रिया का अधिकार प्राप्त है।
वहीं अनुच्छेद 22(1) के अनुसार, गिरफ्तार व्यक्ति अपनी पसंद के वकील से सलाह लेने और अपना बचाव कराने का अधिकार रखता है।
यदि कोई आरोपी वकील करने में सक्षम नहीं है, तो Legal Services Authorities Act, 1987 के तहत उसे निःशुल्क कानूनी सहायता भी उपलब्ध कराई जा सकती है।
अगर स्थानीय वकील केस नहीं लड़ें तो क्या होगा?
यदि किसी कारण से स्थानीय वकील किसी आरोपी का केस नहीं लड़ते, तब भी आरोपी कानूनी सहायता से वंचित नहीं रहेगा।
ऐसी स्थिति में अदालत दूसरे जिले के वकील की नियुक्ति कर सकती है या जिला विधिक सेवा प्राधिकरण (DLSA) के माध्यम से मुफ्त वकील उपलब्ध कराया जा सकता है। जरूरत पड़ने पर अदालत न्याय मित्र (Amicus Curiae) की भी नियुक्ति कर सकती है।
सुप्रीम कोर्ट कई फैसलों में स्पष्ट कर चुका है कि किसी भी आरोपी को कानूनी प्रतिनिधित्व से वंचित नहीं किया जा सकता।
बार काउंसिल ऑफ इंडिया के नियमों के अनुसार, किसी व्यक्तिगत अधिवक्ता को कोई मामला स्वीकार करने या न करने की स्वतंत्रता होती है। लेकिन यदि पूरा बार सामूहिक रूप से किसी आरोपी का बहिष्कार करता है, तो इससे निष्पक्ष न्याय के अधिकार पर सवाल उठ सकते हैं।
राम मंदिर करोड़ों लोगों की आस्था का केंद्र है। ऐसे में चढ़ावे में कथित गड़बड़ी के आरोपों से लोगों में नाराजगी स्वाभाविक है। हालांकि भारत का कानून यह सुनिश्चित करता है कि किसी भी व्यक्ति को, चाहे उस पर कितना भी गंभीर आरोप क्यों न हो, निष्पक्ष सुनवाई और कानूनी सहायता का अधिकार मिले। इसलिए यदि स्थानीय स्तर पर कोई वकील पैरवी नहीं करता, तब भी अदालत आरोपी के लिए वैकल्पिक कानूनी व्यवस्था करेगी।

