August 20, 2026

PCPNDT एक्ट में पुलिस सीधे FIR और जांच नहीं कर सकती, सुप्रीम कोर्ट का बड़ा फैसला

PCPNDT एक्ट में पुलिस FIR और जांच पर सुप्रीम कोर्ट का फैसला

New Delhi/Alive News: सुप्रीम कोर्ट ने PCPNDT एक्ट से जुड़े मामलों में पुलिस की भूमिका को लेकर बड़ा फैसला सुनाया है। कोर्ट ने कहा कि Pre-Conception and Pre-Natal Diagnostic Techniques (Prohibition of Sex Selection) Act, 1994 के तहत भ्रूण का लिंग पता लगाने जैसे अपराधों में पुलिस आम तौर पर सीधे FIR दर्ज कर जांच नहीं कर सकती।

सुप्रीम कोर्ट ने स्पष्ट किया कि PCPNDT एक्ट के तहत कार्रवाई की मुख्य जिम्मेदारी कानून में निर्धारित उचित प्राधिकारी (Appropriate Authority) की है। पुलिस जरूरत पड़ने पर इस प्राधिकारी की सहायता कर सकती है, लेकिन उसे इस कानून के तहत मुख्य जांच एजेंसी नहीं माना जा सकता।

जस्टिस संजय करोल, जस्टिस एन.के. सिंह और जस्टिस ऑगस्टीन जॉर्ज मसीह की पीठ ने कहा कि PCPNDT एक्ट के मामले तकनीकी और संवेदनशील प्रकृति के होते हैं। इनमें मेडिकल जानकारी और विशेष प्रक्रिया की जरूरत होती है। इसलिए कानून में उचित प्राधिकारी को जांच और शिकायत की जिम्मेदारी दी गई है।

पुलिस की भूमिका क्या होगी?

सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि PCPNDT एक्ट के तहत पुलिस की भूमिका मुख्य जांचकर्ता की नहीं है। जहां तक संभव हो, पुलिस की सहायता लेने से बचना चाहिए। हालांकि, उचित प्राधिकारी की जरूरत होने पर पुलिस सहायक भूमिका निभा सकती है।

कोर्ट ने यह भी कहा कि यदि पुलिस PCPNDT एक्ट के तहत FIR दर्ज कर देती है, तो इस विशेष कानून में निर्धारित प्रक्रिया के अनुसार उस FIR को उसके तार्किक निष्कर्ष तक ले जाना संभव नहीं है।

सुप्रीम कोर्ट ने यह भी स्पष्ट किया कि पुलिस पर लगा यह प्रतिबंध केवल PCPNDT एक्ट के अपराधों तक सीमित है। यदि किसी मामले में PCPNDT एक्ट के साथ-साथ सामान्य आपराधिक कानून के तहत कोई अलग अपराध सामने आता है, तो पुलिस उस स्वतंत्र अपराध की जांच और अभियोजन कर सकती है।

सुप्रीम कोर्ट ने PCPNDT एक्ट की धारा 17(4) का उल्लेख करते हुए कहा कि उचित प्राधिकारी को इस कानून के तहत अपराधों के संबंध में शिकायत दर्ज कराने और कार्रवाई करने की जिम्मेदारी दी गई है।

वहीं, धारा 28 के अनुसार मजिस्ट्रेट PCPNDT एक्ट के अपराध का संज्ञान तब तक नहीं ले सकता, जब तक उचित प्राधिकारी या कानून के तहत अधिकृत व्यक्ति की ओर से शिकायत न की जाए।

क्या है पूरा मामला?

यह मामला उत्तर प्रदेश के एक डॉक्टर से जुड़ा था। डॉक्टर के खिलाफ वर्ष 2017 में PCPNDT एक्ट के तहत पुलिस ने FIR दर्ज की थी। आरोप था कि डॉक्टर अवैध तरीके से भ्रूण का लिंग पता कराने और कन्या भ्रूण को जन्म लेने से रोकने में मदद कर रहा था।

डॉक्टर ने इलाहाबाद हाईकोर्ट में याचिका दायर कर पुलिस की कार्रवाई को चुनौती दी थी। उसकी दलील थी कि PCPNDT एक्ट के तहत FIR दर्ज करने का अधिकार पुलिस को नहीं है। उसके मुताबिक, कानून की धारा 28 के तहत शिकायत उचित प्राधिकारी या अधिकृत व्यक्ति द्वारा ही की जा सकती है।

उत्तर प्रदेश सरकार ने इसका विरोध करते हुए कहा था कि PCPNDT एक्ट में पुलिस द्वारा FIR दर्ज करने और जांच करने पर स्पष्ट रोक नहीं है।

इलाहाबाद हाईकोर्ट के फैसले को सुप्रीम कोर्ट की मंजूरी

वर्ष 2024 में इलाहाबाद हाईकोर्ट ने पुलिस द्वारा शुरू की गई आपराधिक कार्यवाही को रद्द कर दिया था। हाईकोर्ट ने कहा था कि PCPNDT एक्ट एक विशेष कानून है और इसमें जांच, तलाशी, जब्ती तथा शिकायत की प्रक्रिया पहले से निर्धारित है। इस प्रक्रिया का संचालन उचित प्राधिकारी द्वारा किया जाना चाहिए।

अब सुप्रीम कोर्ट ने पुलिस द्वारा PCPNDT एक्ट के अपराधों की जांच नहीं किए जाने संबंधी हाईकोर्ट के निष्कर्ष को बरकरार रखा है। हालांकि, मामले के कुछ अन्य पहलुओं पर नए सिरे से विचार के लिए इसे हाईकोर्ट वापस भेज दिया गया है।