Faridabad/Alive News: बीते कुछ समय पहले किसानों की फसलों को बाढ़ से हुए नुकसान के लिए सरकार ने बैंक खातों में सीधे मुआवजा ट्रांसफर कर दिया है। लेकिन छह हज़ार एकड़ में से केवल 489 एकड़ के लिए ही यह मुआवजा दिया गया है। पहले भी 2023 में सिर्फ कुछ ही किसानों को मुआवजा मिला था। जिसके लिए किसान राजस्व विभाग को जिम्मेदार ठहरा रहे हैं। कुछ महीनों पहले यमुना का जलस्तर बढ़ गया था और बाढ़ के हालात भी उत्पन्न हो गए थे, जिसमें नदी किनारे के 25 गांवों में 13 हजार एकड़ में फसलें बर्बाद हो गई थीं।
फसल के खराब होने के बाद किसानों ने अपनी खराब फसलों की तस्वीरें ई-मुआवजा पोर्टल पर अपलोड की थीं। कुछ समय बाद, यह इलाका घटकर नौ हज़ार एकड़ रह गया। जब सरकार ने राजस्व विभाग से फसल के नुकसान का दोबारा वेरिफिकेशन करने को कहा, तो यह इलाका और घटकर छह हज़ार एकड़ रह गया। अब सरकार ने सिर्फ़ 489 एकड़ के लिए मुआवजा दिया है। जिससे किसान बहुत नाराज हैं।
फसल खराब होने के बाद से ही किसानों ने तो मुआवजा मिलने की उम्मीद छोड़ दी थी, जब यह घोषणा की गई थी कि पूरे राज्य के 5.65 लाख किसानों में से सिर्फ 53,821 किसानों को 116 करोड़ रुपये का मुआवजा मिलेगा। अब तस्वीर सबके सामने साफ़ है। कई गांवों ऐसे है जिसमे एक भी किसान को मुआवजा नहीं मिला है। कई किसानों ने पहले से ही सरकार से मुआवजा मिलने की उम्मीद छोड़ दी है और अपनी रबी की फसल बो दी है। अब उन्हें रबी की फसल से अच्छी पैदावार की उम्मीद है।
क्या कहना है किसानों का
मेरे गांव छैंसा में, यमुना बाढ़ से फसलों को हुए नुकसान का ब्यौरा एक हजार किसानों ने ई-मुआवज़ा पोर्टल पर अपलोड किया था। सरकार ने सिर्फ़ 150 किसानों को मुआवज़ा दिया है। यह मुआवजा भी सिर्फ उन्हीं किसानों को दिया गया है जिनके खेत नदी के ठीक किनारे हैं। जिन किसानों के खेत थोड़ी दूरी पर हैं और जिनकी फसलें बाढ़ के पानी से बर्बाद हो गईं, उन्हें कोई मुआवज़ा नहीं मिला है।
-राजेश भाटी, छैंसा
जब मैंने फसल के नुकसान का ब्यौरा ई-मुआवज़ा पोर्टल पर अपलोड किया, तो मेरा आवेदन इस आधार पर खारिज कर दिया गया कि मेरी फसल “मेरी फसल, मेरा ब्यौरा” पोर्टल पर रजिस्टर्ड नहीं थी। मेरे गांव में किसी को भी कोई मुआवज़ा नहीं मिला। इसके अलावा, चांदपुर और नंगला गांवों के किसानों को भी कोई मुआवज़ा नहीं मिला। सरकार ने 2023 में भी यही किया था; उन्होंने तब भी मुआवज़ा नहीं दिया था।
-बाबूलाल भाटी, शाहजहांपुर
क्या कहना है अधिकारी का
हमने ई-मुआवजा पोर्टल पर नुकसान की डिटेल्स वेरिफाई करके सबमिट कर दी हैं। अब, सरकार ने बाढ़ प्रभावित किसानों को मुआवजा सीधे उनके बैंक खातों में भेज दिया है। हमारे पास इस बात का रिकॉर्ड नहीं है कि किस किसान को कितना मुआवज़ा मिला या किस गांव में। यह रिकॉर्ड या तो सरकार के पास है या किसानों के पास। इसलिए, इस मामले पर टिप्पणी करना मुश्किल है।
-विकास सिंह, जिला राजस्व अधिकारी

