October 16, 2026

सातवें नवरात्र पर होगी मां कालरात्रि की पूजा, भय और नकारात्मकता से मुक्ति के लिए करेंगे प्रार्थना

Faridabad/Alive News: शारदीय नवरात्र के सातवें दिन शनिवार, 17 अक्टूबर को मां दुर्गा के सातवें स्वरूप मां कालरात्रि की पूजा-अर्चना की जाएगी। मां कालरात्रि को शक्ति, साहस और बुराई पर विजय का प्रतीक माना जाता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, मां की आराधना करने से भक्तों को भय और नकारात्मक शक्तियों से मुक्ति मिलती है। इस दिन श्रद्धालु व्रत रखकर विधि-विधान से पूजा करेंगे और परिवार की सुख-समृद्धि की कामना करेंगे। मंदिरों में भी विशेष पूजा-अर्चना और आरती की जाएगी।

मां कालरात्रि नवदुर्गा का सातवां स्वरूप हैं। इनका स्वरूप अत्यंत शक्तिशाली माना जाता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, मां का रंग गहरा श्याम है, इनके बाल खुले रहते हैं और ये गर्दभ यानी गधे पर सवार रहती हैं। मां के चार हाथ हैं। इनमें से दो हाथों में अस्त्र-शस्त्र होते हैं, जबकि अन्य दो हाथ भक्तों को अभय और वरदान देने की मुद्रा में रहते हैं। अपने उग्र स्वरूप के बावजूद मां अपने भक्तों का कल्याण करती हैं। इसी कारण इन्हें शुभ फल देने वाली मां शुभंकरी भी कहा जाता है।

गुड़ का भोग लगाने की है मान्यता

नवरात्र के सातवें दिन मां कालरात्रि को गुड़ या गुड़ से बनी मिठाई का भोग लगाने की परंपरा है। पूजा के दौरान श्रद्धालु मां को फूल, रोली, अक्षत, धूप और दीप अर्पित करते हैं। इसके बाद मां की आरती कर परिवार की सुख-शांति और खुशहाली की कामना की जाती है। इस दिन का प्रमुख रंग ग्रे यानी धूसर माना जाता है, हालांकि रंग से जुड़ी परंपराएं अलग-अलग जगहों पर भिन्न हो सकती हैं।

इस मंत्र का करें जाप

मां कालरात्रि की पूजा के दौरान श्रद्धालु इस मंत्र का जाप कर सकते हैं—

ॐ देवी कालरात्र्यै नमः॥

धार्मिक मान्यता के अनुसार, मां की आराधना से साहस और आत्मविश्वास बढ़ता है। श्रद्धालु सुबह स्नान करके पूजा स्थल की सफाई करें, दीपक जलाएं, मां को भोग अर्पित करें और श्रद्धापूर्वक मंत्र जाप व आरती करें। नवरात्र के इस दिन मां दुर्गा की आराधना कर भक्त बुराई पर अच्छाई की जीत और जीवन में सुख-शांति की कामना करते हैं।