सेक्टर-16ए दशहरा मैदान में बनाए जा रहे 65 फुट ऊंचे रावण, मेघनाद और कुंभकरण के पुतले; 18 अक्टूबर को दंडवत परिक्रमा और 21 अक्टूबर को भरत मिलाप कार्यक्रम
Faridabad/Alive News: ओल्ड फरीदाबाद शहर के सबसे प्राचीन दशहरा उत्सवों में शामिल श्री महाबीर दल दशहरा कमेटी, लैय्या बिरादरी और पंजाबी समाज का 77वां दशहरा उत्सव इस वर्ष भी धूमधाम से मनाया जाएगा। उत्सव को लेकर सेक्टर-16ए स्थित दशहरा मैदान में तैयारियां जोर-शोर से चल रही हैं। इस बार भी मैदान में 65 फुट ऊंचे रावण, मेघनाद और कुंभकरण के पुतले तैयार किए जा रहे हैं। दशहरा पर्व के अवसर पर 20 अक्टूबर को पुतलों का दहन किया जाएगा।
आयोजकों के अनुसार, रावण दहन कार्यक्रम में केंद्रीय राज्य मंत्री कृष्णपाल गुर्जर, हरियाणा के कैबिनेट मंत्री विपुल गोयल, पूर्व मंत्री सीमा त्रिखा, मुख्यमंत्री के पूर्व राजनीतिक सचिव एवं वरिष्ठ भाजपा नेता अजय गौड़, मेयर प्रवीण बत्रा जोशी और भाजपा जिलाध्यक्ष पंकज पूजन रामपाल सहित अन्य गणमान्य लोगों के शामिल होने की संभावना है।
लैय्या बिरादरी एवं दशहरा कमेटी के प्रधान धर्म बरेजा, महासचिव राज मिगलानी, पंजाबी सभा के प्रधान संजीव सलूजा, उपप्रधान यश बब्बर, महेंद्र वर्मा पप्पू, पार्षद पति करण सिंगला, सरपरस्त ओमप्रकाश नारंग और लोकनाथ मिगलानी ने बताया कि दशहरा उत्सव की तैयारियां लगातार जारी हैं। कमेटी की ओर से हर वर्ष की तरह इस बार भी धार्मिक परंपराओं और सांस्कृतिक कार्यक्रमों के साथ पर्व मनाया जाएगा।
18 अक्टूबर को दंडवत परिक्रमा, 20 को निकलेगी शोभायात्रा
धर्म बरेजा और संजीव सलूजा ने बताया कि उत्सव के तहत 18 अक्टूबर को रात 10 बजे लैय्या बिरादरी स्थित श्रीराम हनुमान मंदिर में दंडवत परिक्रमा का आयोजन किया जाएगा। इस अवसर पर पूर्व वरिष्ठ उपमहापौर देवेंद्र चौधरी और पंजाबी सभा के चेयरमैन वासुदेव सलूजा सहित अन्य लोग उपस्थित रहेंगे।
20 अक्टूबर को शाम 4 बजे भव्य दशहरा शोभायात्रा निकाली जाएगी। शोभायात्रा में भगवान श्रीराम, लक्ष्मण और माता सीता की झांकियां आकर्षण का केंद्र रहेंगी। इसके बाद सेक्टर-16ए दशहरा मैदान में रावण, मेघनाद और कुंभकरण के पुतलों का दहन किया जाएगा।
21 अक्टूबर को होगा भरत मिलाप
दशहरा उत्सव के अगले दिन, 21 अक्टूबर को लैय्या बिरादरी स्थित श्रीराम हनुमान मंदिर परिसर में भरत मिलाप कार्यक्रम आयोजित किया जाएगा।
आयोजन समिति के सदस्यों ने बताया कि पिछले 77 वर्षों से दशहरा उत्सव आयोजित करने का उद्देश्य नई पीढ़ी को भारतीय संस्कृति, धार्मिक मान्यताओं और पुरानी परंपराओं से परिचित कराना है। समिति के अनुसार, हर वर्ष इस आयोजन में लोगों की भागीदारी के माध्यम से परंपराओं को आगे बढ़ाने का प्रयास किया जाता है।

