Faridabad/Alive News: यमुना नदी से सटी हरियाणा और उत्तर प्रदेश की जमीन के स्पष्ट बंटवारे के लिए इंटर-स्टेट बॉर्डर पर सीमेंटेड पिलर लगाए जा रहे हैं। यह कार्य लोक निर्माण विभाग द्वारा किया जा रहा है। फरीदाबाद जिले में बसंतपुर से मंझावली तक कुल 150 पिलर लगाए जाने हैं, जिनमें से अब तक 130 पिलर स्थापित किए जा चुके हैं। शेष पिलर भी इसी माह लगाए जाने की संभावना है।
जानकारी के अनुसार, ये पिलर करीब 70 फुट ऊंचे बनाए जा रहे हैं ताकि दूर से ही स्पष्ट रूप से दिखाई दे सकें। पिलर लगने के बाद वर्षों से चला आ रहा सीमांकन विवाद समाप्त होने की उम्मीद है। इससे दोनों राज्यों के किसानों को अपनी-अपनी जमीन की वास्तविक सीमा का स्पष्ट ज्ञान हो सकेगा।
मानसून के दौरान यमुना नदी का जलस्तर बढ़ने पर भी इन सीमेंटेड पिलरों को कोई नुकसान नहीं पहुंचेगा। विभाग द्वारा इनका आधार अत्यंत मजबूत बनाया जा रहा है, जो तेज जलधारा और कटाव को सहन करने में सक्षम होगा।
हर साल बदल जाती है सीमा रेखा
यमुना नदी हरियाणा और उत्तर प्रदेश के बीच प्राकृतिक सीमा का कार्य करती है। बरसात के मौसम में नदी का जलस्तर बढ़ने और धारा का रुख बदलने से हर साल सीमा रेखा प्रभावित होती है। कभी हरियाणा की जमीन उत्तर प्रदेश की ओर चली जाती है, तो कभी यूपी की जमीन हरियाणा की सीमा में आ जाती है।
इस स्थिति के चलते जमीन पर कब्जे और फसलों को लेकर दोनों राज्यों के किसानों के बीच विवाद होते रहे हैं। कई बार ये विवाद हिंसक संघर्ष का रूप भी ले चुके हैं और पुलिस में मामले दर्ज होते रहे हैं। राजस्व विभाग द्वारा कई बार पैमाइश कराई गई, लेकिन कोई स्थायी समाधान नहीं निकल पाया।
दीक्षित अवॉर्ड के पिलर बह गए थे
1970 के दशक में दीक्षित अवॉर्ड के आधार पर यमुना किनारे सीमा निर्धारण के लिए पिलर लगाए गए थे, लेकिन नदी के तेज बहाव में वे बह गए। इसके बाद सीमा विवाद फिर से गहराता चला गया।
स्थायी समाधान के लिए बाद में सर्वे ऑफ इंडिया द्वारा विस्तृत सर्वे कराया गया। सर्वे रिपोर्ट दोनों राज्यों के अधिकारियों को सौंपी गई, जिसके आधार पर अब यमुना के साथ इंटर-स्टेट बॉर्डर पर नए और मजबूत सीमेंटेड पिलर लगाए जा रहे हैं।
जिले में 25 किलोमीटर बहती है यमुना
दिल्ली के बाद फरीदाबाद जिले की सीमा में यमुना नदी करीब 25 किलोमीटर तक बहती है। नदी के दोनों किनारों पर हरियाणा और उत्तर प्रदेश के 50 से अधिक गांव स्थित हैं। नए पिलर जमीन के लगभग 50 फुट नीचे और 20 फुट ऊपर तक बनाए जा रहे हैं। अधिक गहराई इसलिए रखी गई है ताकि तेज बहाव के बावजूद पिलर अपनी जगह से न हिलें और सीमा स्थायी रूप से सुरक्षित रह सके।

