हरियाणा की सैनी सरकार ने ‘हरियाणा ट्रैवल एजेंट पंजीकरण एवं विनियमन नियम, 2026’ को दी गई मंजूरी राज्य के सामाजिक और आर्थिक परिदृश्य के लिहाज से एक दूरगामी और ऐतिहासिक कदम है। बीते कुछ वर्षों में ‘डंकी रूट’ यानी अवैध रास्तों से विदेश जाने के बढ़ते चलन और फर्जी ट्रैवल एजेंटों के जाल ने प्रदेश के हजारों युवाओं के भविष्य को निगल लिया है। ऐसे में विदेश भेजने के नाम पर ठगी, मानव तस्करी और धोखाधड़ी रोकने के लिए सभी नए व पुराने एजेंटों, उनकी शाखाओं और सेवा श्रेणियों के लिए अलग से रजिस्ट्रेशन अनिवार्य करना एक ऐसा फैसला है, जिसकी जरूरत बहुत पहले से महसूस की जा रही थी।
विदेश जाकर बेहतर रोजगार और सुनहरा भविष्य पाने की चाह में हरियाणा का युवा न केवल अपनी जमा-पूंजी और जमीनें दांव पर लगा रहा है, बल्कि कई बार अपनी जान भी जोखिम में डाल देता है। सोशल मीडिया और विज्ञापनों के जरिए सब्जबाग दिखाने वाले अवैध एजेंट युवाओं और उनके परिवारों की लाचारी का फायदा उठाकर करोड़ों रुपयों का चूना लगाते हैं। कई मामलों में तो युवाओं को विदेश में बंधक बना लिया जाता है या फिर अवैध सीमाओं को पार करते समय जेल की हवा खानी पड़ती है। हाल ही में जिस तरह से ‘डंकी’ के जरिए अमेरिका और यूरोपीय देशों में घुसने की कोशिश कर रहे युवाओं की दर्दनाक कहानियां सामने आई हैं, उसने पूरे समाज को हिलाकर रख दिया था। सरकार का यह नया कानून सीधे तौर पर इसी अवैध और खतरनाक तंत्र पर करारी चोट करता है।
नियमों के तहत पासपोर्ट, स्टडी वीजा, टिकटिंग और टूर एजेंसियों जैसी हर सेवा श्रेणी के लिए पृथक पंजीकरण को अनिवार्य बनाना पारदर्शिता की दिशा में बड़ा सुधार है। इसके अलावा, पुलिस सत्यापन के बाद 30 दिनों के भीतर तीन साल की अवधि के लिए प्रमाण पत्र जारी करने और इस सूची को ‘अंत्योदय सरल पोर्टल’ सहित गृह व पुलिस विभाग की वेबसाइटों पर सार्वजनिक करने का प्रावधान बेहद सराहनीय है। जब हर वैध एजेंट का ब्योरा सरकारी पोर्टल पर सार्वजनिक रूप से उपलब्ध होगा, तो आम नागरिक और छात्र किसी भी एजेंट की सेवा लेने से पहले उसकी प्रामाणिकता की जांच खुद कर सकेंगे। इससे धोखाधड़ी की गुंजाइश न के बराबर रह जाएगी।
हालांकि, किसी भी कानून की सफलता केवल उसके कागजी प्रारूप पर नहीं, बल्कि उसके कड़े कार्यान्वयन पर निर्भर करती है। पूर्व में भी ऐसे प्रावधानों के बावजूद चोर रास्तों से दुकानें चलाने वाले एजेंट सक्रिय रहे हैं। इसलिए सरकार और पुलिस प्रशासन को यह सुनिश्चित करना होगा कि बिना रजिस्ट्रेशन के काम करने वाले एजेंटों पर तुरंत और सख्त से सख्त कार्रवाई हो। जिला स्तर पर इसकी नियमित निगरानी की व्यवस्था की जानी चाहिए ताकि कोई भी अवैध एजेंट कानून के दायरे से बाहर न छूट सके।
इसके साथ ही, युवाओं और अभिभावकों को भी जागरूक होने की आवश्यकता है। केवल सरकारी सख्ती से यह समस्या पूरी तरह खत्म नहीं होगी, बल्कि हमारे समाज को भी यह समझना होगा कि शॉर्टकट और अवैध रास्ते सिर्फ संकट पैदा करने, परेशानी पैदा करते हैं। सरकार का यह महत्वपूर्ण कदम निसंदेह प्रदेश के युवाओं की सुरक्षा, उनकी मेहनत की कमाई की रक्षा करने और मानव तस्करी जैसी सामाजिक बुराई को खत्म करने की दिशा में भी एक सुरक्षा कवच साबित होगा।
(लेखक वरिष्ठ पत्रकार एवं अलाईव न्यूज के संपादक हैं)

