Faridabad/Alive News: एनआईटी दशहरे ग्राउंड के मेले में झूले नहीं लगने से रोनक पिछले वर्षो जैसी नजर नहीं आई। झूला संचालक को झूले लगाने की अनुमति नहीं मिलने से वो परेशान दिखाई दिये, वहीं, मेले में पहुंचे लोगों ने भी झूलों की कमी और व्यवस्थाओं को लेकर सवाल उठाये। सिद्धपीठ श्री हनुमान मंदिर सनातन धर्म महावीर दल एवं पंजाबी सभा, फरीदाबाद की ओर से एनआईटी में 76वें दशहरा महोत्सव का आयोजन श्रद्धा और उत्साह के साथ हर वर्ष की तरह किया जा रहा था। इस अवसर पर 65 फीट ऊंचे रावण के पुतले का दहन किया गया। आयोजन में केंद्रीय राज्य मंत्री कृष्णपाल गुर्जर, बड़खल विधायक धनेश अदलक्खा और पूर्व विधायक चंदर भाटिया सहित कई गणमान्य लोग मौजूद रहे।
उड़ती धूल, साफ-सफाई और जर्जर सड़क की व्यवस्था पर उठे सवाल
मेले में पहुंचे लोगों ने पानी के छिड़काव न होने से उड़ती धूल, ग्राउंड की साफ-सफाई और जर्जर सड़क की व्यवस्था को लेकर भी नाराजगी जताई। ग्राउंड के पास अधूरी पड़ी सड़क पर पत्थर, कंकड़ और कचरा दिखाई दिया। लोगों का कहना था कि मेले में बड़ी संख्या में परिवार और बच्चे आते हैं, इसलिए नगर निगम को सफाई और सड़क की व्यवस्था पर विशेष ध्यान देना चाहिए। टूटी सड़क पर बच्चों के गिरने से जख्मी होने का खतरा भी बना रहा। लोगों ने कहा कि धार्मिक आयोजन के साथ-साथ लोगों के लिए सुविधा, साफ-सफाई और सुरक्षा का ध्यान रखना भी प्रशासन और आयोजकों का है।
झूले नहीं लगने से मेले की रोनक पर पड़ा असर
एनआईटी के दशहरा ग्राउंड में इस बार झूले नहीं होने के कारण मेले में पहले जैसी चहल-पहल देखने को नहीं मिली। नगर निगम की ओर से मैदान के अंदर झूले लगाने की अनुमति नहीं दिए जाने के कारण झूला संचालकों को बाहर छोटी-छोटी जगहों पर अपने झूले लगाने पड़े। उनका कहना है कि वे हर साल दूर-दूर से मेले में कमाई की उम्मीद लेकर आते हैं, लेकिन इस बार पर्याप्त जगह नहीं मिलने से उनका कारोबार प्रभावित हुआ है।
झूला संचालकों के मुताबिक, आने-जाने का किराया, सामान ढोने का खर्च और अन्य खर्च निकालना भी मुश्किल हो रहा है। कुछ संचालकों ने बताया कि उन्हें बार-बार जगह बदलनी पड़ी, जिससे उन्हें परेशानी उठानी पड़ी। उनका कहना है कि झूले मेले का अहम हिस्सा होते हैं और इनके लगने से बच्चों का मनोरंजन होने के साथ मेले में लोगों की आवाजाही भी बढ़ती है।
झूला संचालकों ने बयां किया अपना दर्द
आगरा से आये झूला संचालक अजब सिंह ने बताया कि वह करीब 12 साल से दशहरे के मेले में झूले लगाने आ रहे हैं। इस बार मैदान के अंदर झूले लगाने की अनुमति नहीं मिलने से उन्हें परेशानी का सामना करना पड़ा है। उन्होंने कहा कि वे दूर से किराया और अन्य खर्च करके कमाई की उम्मीद लेकर आए थे, लेकिन इतनी कम जगह में झूला लगाना मुश्किल हुआ। इस बार खर्च निकालना भी चुनौती बन गया है।
एक अन्य झूला संचालक मोहम्मद अफरोज ने बताया कि वह भी दूर से मेले में कारोबार करने आए हैं, लेकिन इस बार उन्हें मैदान के अंदर जगह नहीं मिली। उनका कहना है कि बार-बार जगह बदलने और पुलिस प्रशासन दवारा सामान हटाने के कारण उन्हें काफी परेशानी उठानी पड़ी है। उन्होंने कहा कि वे रोजी-रोटी कमाने के लिए यहां आते हैं, लेकिन इस बार कमाई करना मुश्किल हो गया है। उनके मुताबिक, झूले नहीं लगने से बच्चों के मनोरंजन के साथ-साथ उनके रोजगार पर भी असर पड़ा है। उनके चेहरों पर मायूसी साफ नजर आई।
क्या कहा मेले में पहुंचे लोगों ने
फरीदाबाद के सेक्टर-7 से आये विशाल अपने परिवार और बच्चों के साथ रावण दहन देखने पहुंचे। उन्होंने कहा कि इस बार सुरक्षा और व्यवस्था के लिहाज से इंतजाम ठीक हैं, लेकिन मैदान के अंदर झूले नहीं होने से बच्चों के मनोरंजन में कमी रह गई। उनके मुताबिक, झूले मेले का अहम हिस्सा होते हैं और इनके लगने से बच्चों को ज्यादा आनंद मिलता है। ग्राउंड में आने के लिए एक तरफ की सड़क टूटी है, जिस पर पत्थर पडे हैं और बच्चें गिरकर चोटिल हो रहे है।
फरीदाबाद एनएच-3 निवासी नरेश मक्कर ने कहा कि इस बार मेले में लोग आराम से घूम पा रहे हैं। उन्होंने झूले नहीं लगाने के फैसले को सुरक्षा के लिहाज से उचित बताया। उनके अनुसार, झूलों के कारण पहले भीड़ और परेशानी बढ़ती थी, जबकि इस बार लोगों को घूमने के लिए ज्यादा जगह मिल रही है। पानी का छिड़काव नही होने से ग्राउंड में धूल उड़ रही है।
फरीदाबाद के सेक्टर-22 निवासी कैलाश भाटिया अपनी पोती के साथ मेला देखने पहुंचे। उन्होंने कहा कि पहले मेले में काफी भीड़ और रोनक होती थी, लेकिन इस बार झूले नहीं होने से मेला कुछ खाली-खाली लग रहा है। उन्होंने यह भी कहा कि बच्चों के मनोरंजन के लिए झूले जरूरी हैं। मैदान के आसपास सफाई नही है।

