Prabhjot kaur/Alive News
Faridabad: प्रदूषण बढ़ने के साथ ही छोटे बच्चों की सेहत पर इसका असर दिखने लगा है। दिनभर सामान्य रहने वाले बच्चों को रात होते ही तेज खांसी और सांस लेने में परेशानी होने लगती है। कई बच्चों को गले में खराश, जुकाम और एलर्जी की शिकायत भी हो रही है। जिले का वायु गुणवत्ता सूचकांक (एक्यूआई) 120 के पार पहुंचने के बीच सरकारी और निजी अस्पतालों में ऐसे बच्चों के पहुंचने का सिलसिला जारी है। ईएसआईसी और जिला अस्पताल में रोजाना करीब 30 से 40 बच्चे इलाज के लिए पहुंच रहे हैं। वहीं, निजी अस्पतालों में यह संख्या 40 से 50 तक है।
जिला अस्पताल के वरिष्ठ चिकित्सा अधिकारी एवं बाल रोग विशेषज्ञ डॉ. विकास गोयल ने बताया कि हवा में मौजूद धूल और प्रदूषण के बारीक कण बच्चों की सांस की नलियों में जलन पैदा कर सकते हैं। इससे खांसी, एलर्जी और सांस लेने में परेशानी बढ़ सकती है। छोटे बच्चों पर इसका असर अधिक पड़ सकता है। अस्थमा और सांस संबंधी बीमारी से पीड़ित बच्चों को विशेष सावधानी बरतनी चाहिए।
सुबह-शाम बाहर खेलने से बचाएं बच्चे
ईएसआईसी अस्पताल की शिशु रोग विशेषज्ञ डॉ. प्रियंका ने बताया कि प्रदूषण के कारण बच्चों में खांसी, जुकाम और सांस संबंधी परेशानियां सामने आ रही हैं। अस्पताल में रोजाना 30 से 40 बच्चे ऐसी शिकायतों के साथ पहुंच रहे हैं। अभिभावक बच्चों को सुबह और शाम बाहर खेलने से बचाएं।
6 से 12 साल के बच्चे भी हो रहे प्रभावित
निजी अस्पताल के शिशु रोग विशेषज्ञ डॉ. प्रभात ने बताया कि रोजाना करीब 40 से 50 बच्चे प्रदूषण से जुड़ी परेशानियों के साथ पहुंच रहे हैं। इनमें छह से 12 साल तक के बच्चे शामिल हैं। अभिभावक बच्चों का विशेष ध्यान रखें और बाहर भेजते समय मास्क पहनाएं।

