Faridabad/Alive news: फरीदाबाद जिला के सरकारी स्कूलों में पढ़ने वाले छात्र छात्राओं को शैक्षणिक सत्र शुरू होने के 11 दिन बीत चुके है लेकिन अभी तक उन्हे नइ किताबे नही मिल सकी है । एैसे मे विद्यार्थि पुरानी किताबे और नोटस के सहारे पढाई करने को मजबूर है,जिससे विद्यार्थियों की पढाई प्रभावित होगी।
किताबो की आपूर्ति को लेकर शिक्षा विभाग की ओर से कोई स्पषट जानकारी नही आई है। अधिकारियों को भी जानकारी नही पता चली है की किताबे कब तक पहुंचेगी । ऐसे में विद्यार्थियों की पढाई पुरानी किताबों और नोट्स के सहारे ही चल रही है।ऐसे मे शिक्षकों को भी पढाई जारी रखने मे कठनाईयो का सामना करना पड रहा है
और सिलेबस समय पर पूरा होना मुशकिल लग रहा है।
जिले मे फरीदाबाद और बल्लभगढ़ ब्लाक में सैक़डो सरकारी स्कूल संचालित हो रहे हैं। जिसमे अभी दाखिला प्रक्रिया जारी है।
इसे पिछले साल भी विद्यार्थियों को आधा शैक्षणिक सत्र बीतने के बाद किताबो का ईंतजाम कराया गया था। जब जाकर सिलेबस को पूरा करने और परीक्षाओं की तैयारी कराने में अध्यापकों को परेशानियो का सामना करमा पडा था ।
नए शैक्षण मे भी इस स्थिति को देखकर लग रहा है कि विद्यार्थियों को लंबा इंतजार करना पड़ सकता है। क्योंकि जिला शिक्षा अधिकारी कार्यालय में ही किताबें नहीं पहुंची है।
पुरानी किताबों और नोट्स का सहारा
पहली कक्षा से लेकर आठवीं कक्षा तक के विद्यार्थियों को सरकार की ओर से निशुल्क किताबें उपलब्ध कराई जाती हैं। नियम के मुताबिक यह किताबें मार्च के दूसरे सप्ताह तक स्कूलों में पहुंच जानी चाहिए थी, जिससे नए शैक्षण की शुरुआत बिना किसी परेशानी के हो सके। लेकिन काफी समय के कारण शिक्षण कार्य प्रभावित हो रहा है।
पुरानी किताबों की खराब हालत से पढाई प्रभावित
वहीं, फिलहाल स्कूलों में प्रमोट हुए विद्यार्थियों की पुरानी किताबें नए छात्रों को देकर पढ़ाई कराई जा रही है। इन किताबों में से बहुत पेज गायब हैं, जबकि कुछ किताबों की हालत बेहद खराब है। ऐसे में अध्यापक नोट्स के सहारो से विद्यार्थियों को पढ़ा रहे है।
कुछ स्कूल तो ऐसे हैं, जहां पर तो सभी विद्यार्थियों के पास पुरानी पुस्तकें भी नहीं हैं। इसका सीधा असर विभाग के प्रवेश उत्सव कार्यक्रम पर पड़ रहा है। एक तरफ विद्यालयों में शिक्षकों की कमी है, ऊपर से विद्यार्थियों को पुस्तकें भी नहीं मिल रही हैं।

