Faridabad/Alive News: डीएवी शताब्दी महाविद्यालय में आयोजित दो दिवसीय अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन “कृत्रिम बुद्धिमत्ता एवं पुस्तकालयों तथा शैक्षणिक संस्थानों में नवोन्मेषी सेवाएं (AISLA-2026)” का समापन डीआरडीओ के डिप्टी डायरेक्टर एवं मुख्य अतिथि डॉ. के.पी. सिंह के संबोधन के साथ हुआ।
मुख्य अतिथि ने कहा कि एआई के बेहतर और संतुलित उपयोग से शिक्षा, शोध तथा पुस्तकालय प्रबंधन को नए आयाम मिलेंगे। सम्मेलन में देश-विदेश से आए शिक्षाविदों व विशेषज्ञों ने एआई के प्रभाव, लाभ और चुनौतियों पर चर्चा की तथा विभिन्न तकनीकी सत्रों में लगभग 100 शोध-पत्र प्रस्तुत किए गए।
इस अवसर पर पुस्तकालय क्षेत्र में उत्कृष्ट योगदान देने वाले पुस्तकालयाध्यक्षों को सम्मानित किया गया, जिनमें अग्रवाल महाविद्यालय, बल्लभगढ़ के डॉ. रामचंद्र प्रमुख रहे।
अंतरराष्ट्रीय सत्र में केन्यट्टा विश्वविद्यालय के डैनियल वांबिरी ने ऑनलाइन एआई के वैश्विक परिप्रेक्ष्य पर विचार रखे, जबकि अमेरिका से वक्ता सौम्य ने एआई के व्यावहारिक उपयोगों पर प्रकाश डाला।
महाविद्यालय के प्राचार्य डॉ. नरेंद्र कुमार ने एआई को शिक्षा और पुस्तकालय सेवाओं के लिए परिवर्तनकारी शक्ति बताया। समापन सत्र में उत्कृष्ट शोध-पत्र प्रस्तुत करने वाले प्रतिभागियों को प्रमाण-पत्र व स्मृति-चिह्न देकर सम्मानित किया गया।

