Faridabad/Alive News: स्वास्थ्य विभाग शहर के सरकारी अस्पतालों में मरीजों को बेहतर सुविधाएं देने के दावे कर रहा है, लेकिन जिला अस्पताल में मरीजों को इलाज तक पहुंचने के लिए बुनियादी सुविधा व्हीलचेयर और स्ट्रेचर भी आसानी से उपलब्ध नहीं हो रही है। ऐसे में चलने में असमर्थ मरीजों को कहीं परिजन कंधे का सहारा देकर तो कहीं गोद में उठाकर इलाज के लिए ले जाते नजर आए।
बल्लभगढ़ निवासी आशू अस्पताल में इलाज के लिए पहुंचे थे। उनके पैर में चोट लगी थी, जिसके कारण उन्हें चलने में परेशानी हो रही थी। आशू ने बताया कि उन्होंने अस्पताल में व्हीलचेयर के बारे में डॉक्टर से पूछा, लेकिन उन्हें कोई जानकारी नहीं दी गई। इसके बाद उन्हें अपने पिता के कंधे के सहारे ही अस्पताल में आना-जाना पड़ा। चोट के कारण उनके लिए सामान्य तरीके से चलना मुश्किल है। ऐसे में अगर व्हीलचेयर मिल जाती तो उन्हें काफी राहत मिलती।
वॉकर पर बैठकर इंतजार करता रहा 17 वर्षीय मरीज
अस्पताल में ड्रेसिंग कराने पहुंचे 17 वर्षीय पीयूष भी अव्यवस्था से परेशान नजर आए। वह काफी देर से लाइन में अपनी बारी का इंतजार कर रहे थे। पीयूष ने बताया कि अस्पताल में बैठने के लिए उन्हें कोई सीट नहीं मिली और व्हीलचेयर भी उपलब्ध नहीं हुई। तो मजबूरी में उन्हें अपने वॉकर पर ही बैठकर इंतजार करना पड़ा।
बच्चे को गोद में उठाकर इलाज के लिए पहुंची महिला
अस्पताल में एक महिला अपने बेटे को गोद में उठाकर इलाज वाले वार्ड की ओर जाती दिखाई दी। बच्चे को संभालते हुए महिला के चेहरे पर परेशानी साफ नजर आ रही थी। उसने बताया कि उसके बेटे को इलाज के लिए अस्पताल लाना पड़ता है, लेकिन यहां पहुंचने के बाद सबसे बड़ी परेशानी उसे वार्ड तक ले जाने की होती है। महिला के अनुसार, अस्पताल में उसे कई बार व्हीलचेयर या स्ट्रेचर नहीं मिल पाता। ऐसे में उसे मजबूरी में अपने बेटे को गोद में उठाकर ही एक जगह से दूसरी जगह ले जाना पड़ता है। उसने कहा कि मां के लिए अपने बच्चे को गोद में उठाना कोई परेशानी नहीं, लेकिन जब बच्चा बीमार हो और खुद चल भी न पाए तो अस्पताल से थोड़ी मदद की उम्मीद रहती है।
गेट पर गार्ड नहीं, इमरजेंसी के पास खड़े होते रहे ऑटो
अस्पताल के मुख्य गेट के बाहर सुरक्षा व्यवस्था में भी कमी नजर आई। अस्पताल के गेट के आसपास राउंड के लिए कोई गार्ड नजर नहीं आया। इसका फायदा उठाकर कई ऑटो चालक इमरजेंसी के पास तक ऑटो लेकर पहुंचते और वहीं खड़े होकर सवारियां भरते दिखाई दिए। इस वजह से इमरजेंसी के बाहर कुछ समय के लिए जाम जैसी स्थिति भी बनी। मरीजों और उनके परिजनों को आने-जाने में परेशानी हुई। सवाल यह है कि जब इमरजेंसी के बाहर वाहनों की आवाजाही नियंत्रित करने और मरीजों के लिए रास्ता सुगम रखने की जिम्मेदारी अस्पताल की है, तो वहां सुरक्षा कर्मियों की पर्याप्त तैनाती क्यों नहीं दिखाई दी?
क्या कहना है अधिकारी का
मुझे इसकी जानकारी नहीं है। अस्पताल में प्रयाप्त व्हीलचेयर और स्ट्रेचर है। पर अगर फिर भी ऐसा हुआ है तो इसकी जांच की जाएगी।
– डाॅ विकास गोयल, कार्यवाहक प्रधान चिकित्सा अधिकारी

