Faridabad/Alive News: फरीदाबाद में क्रेडिट कार्ड की लिमिट बढ़ाने और रिवॉर्ड पॉइंट रिडीम कराने के नाम पर साइबर ठगी करने वाले गिरोह का साइबर थाना सेंट्रल की टीम ने पर्दाफाश किया है। पुलिस ने गिरोह से जुड़े पांच आरोपियों को दिल्ली और उत्तर प्रदेश से गिरफ्तार किया है। आरोपी दिल्ली के साकेत इलाके में कॉल सेंटर की तरह सेटअप चलाकर लोगों को फोन करते थे। पुलिस ने आरोपियों के कब्जे से 70 हजार रुपये नकद, 4 मोबाइल फोन और 145 अनएक्टिव सिम कार्ड बरामद किए हैं। सभी आरोपियों को अदालत में पेश करने के बाद जेल भेज दिया गया है।
पुलिस के अनुसार गिरफ्तार आरोपियों की पहचान रजत कुमार निवासी मैनपुरी, उत्तर प्रदेश, विकास सिंह निवासी आजमगढ़, उत्तर प्रदेश, शिव शंकर उर्फ राघव निवासी संगम विहार, दिल्ली, अब्दुल हक निवासी संगम विहार, दिल्ली और रोहित निवासी बहराइच, उत्तर प्रदेश के रूप में हुई है।
पुलिस जांच के अनुसार आरोपी लोगों को बैंक कर्मचारी बनकर फोन करते थे। वे क्रेडिट कार्ड की लिमिट बढ़ाने या रिवॉर्ड पॉइंट रिडीम कराने का झांसा देते थे। बातचीत के दौरान लोगों को अपनी बातों में उलझाकर WhatsApp पर लिंक भेजते और APK फाइल डाउनलोड करवाते थे। इसके बाद क्रेडिट कार्ड से जुड़ी जानकारी हासिल कर खाते से रकम निकाल लेते थे।
साइबर थाना सेंट्रल में दर्ज मामले में शिकायतकर्ता के पास Axis Bank का क्रेडिट कार्ड था। क्रेडिट कार्ड से पैसे नहीं निकलने पर उसने कस्टमर केयर से संपर्क किया था। इसके बाद आरोपियों ने बैंक कर्मचारी बनकर उससे संपर्क किया और क्रेडिट कार्ड की समस्या ठीक करने का झांसा दिया। आरोपियों ने WhatsApp पर लिंक भेजकर APK फाइल डाउनलोड करवाई। इसके बाद क्रेडिट कार्ड की जानकारी हासिल कर तीन अलग-अलग ट्रांजेक्शन के जरिए 20,277 रुपये, 5,000 रुपये और 45,473 रुपये, कुल 70,750 रुपये निकाल लिए गए।
जांच में पुलिस को पता चला कि रजत कुमार गिरोह का मुख्य आरोपी है। वह कॉल सेंटर का संचालन करता था और बाकी आरोपियों को अलग-अलग काम देता था। आरोपी विकास सिंह कॉल सेंटर में काम करने वाली लड़कियों को ट्रेनिंग देता था। वह उन्हें लोगों से बातचीत करने, उन्हें अपनी बातों में उलझाने और क्रेडिट कार्ड से जुड़ी जानकारी हासिल करने के तरीके बताता था। कॉल सेंटर में इस्तेमाल होने वाले मोबाइल फोन और सिम कार्ड की व्यवस्था भी विकास देखता था। पुलिस के अनुसार कॉल सेंटर में काम करने वाली अन्य लड़कियों की गिरफ्तारी अभी बाकी है।
आरोपी अब्दुल हक लोगों से बातचीत के बाद उन्हें WhatsApp पर लिंक भेजकर APK फाइल डाउनलोड करवाता था। इस APK के जरिए ठगी को अंजाम देने में मदद मिलती थी।
वहीं, आरोपी रोहित सिम कार्ड उपलब्ध कराने का काम करता था। पुलिस के मुताबिक वह सिम कार्ड बेचने के लिए कैनोपी लगाता था। सिम लेने वाले ग्राहक के नाम पर दो सिम कार्ड जनरेट किए जाते थे। इनमें से एक सिम ग्राहक को दिया जाता था, जबकि दूसरा अपने पास रख लिया जाता था। बाद में इन सिम कार्डों को साइबर ठगी में इस्तेमाल करने के लिए रजत को उपलब्ध कराया जाता था। पुलिस ने रोहित के कब्जे से 145 अनएक्टिव सिम कार्ड बरामद किए हैं।
जांच में यह भी सामने आया कि शिकायतकर्ता के क्रेडिट कार्ड से ठगी गई रकम से आरोपियों ने तीन मोबाइल फोन खरीदे थे। बाद में इन मोबाइल फोन को आरोपी शिव शंकर उर्फ राघव को बेच दिया गया। पुलिस ने ठगी की रकम से खरीदे गए मोबाइल फोन और अन्य सामान के संबंध में भी जानकारी जुटाई है।

