Faridabad/Alive News: फरीदाबाद के बल्लभगढ़ क्षेत्र के साहूपुरा स्थित राजकीय वरिष्ठ माध्यमिक विद्यालय में मंगलवार सुबह बच्चों को दूसरे स्कूल में भेजे जाने के विरोध में अभिभावकों और स्टूडेंट ने स्कूल के बाहर धरना दिया। अभिभावकों का आरोप है कि कक्षा छठी से आठवीं तक के स्टूडेंट को करीब चार किलोमीटर दूर सेक्टर-65 स्थित सरकारी स्कूल में शिफ्ट किया जा रहा है। इससे बच्चों को रोजाना लंबी दूरी तय करनी पड़ेगी और खासकर आसपास के गांवों से आने वाले स्टूडेंट को अधिक परेशानी का सामना करना पड़ेगा। धरने में करीब 200 लोग शामिल होने का दावा किया गया। अभिभावकों ने बच्चों की पढ़ाई वर्तमान स्कूल में ही जारी रखने और स्कूल की व्यवस्थाओं में सुधार की मांग की।धरने पर बैठे अभिभावकों ने स्कूल प्रबंधन की कार्यप्रणाली को लेकर भी गंभीर आरोप लगाए। अभिभावक जितेंद्र कुमार ने बताया कि उनके तीन बच्चे इसी स्कूल में पढ़ते हैं। उनका कहना है कि साहूपुरा के अलावा सुनपेड, मलेड़ना, फतेहपुर बिलोच और आसपास के गांवों से भी स्टूडेंट यहां पढ़ने आते हैं। ऐसे में स्कूल बदलने से दूर-दराज के उनकी परेशानी और बढ़ जाएगी। उन्होंने आरोप लगाया कि स्टूडेंट को स्कूल से संबंधित काम कराने और सफाई में लगाने की शिकायतें भी सामने आई हैं। कुछ स्टूडेंट के सफाई के दौरान बीमार होने का भी दावा किया गया। वहीं, अभिभावकों ने आरोप लगाया कि स्कूल की प्रिंसिपल की ओर से सफाई न करने पर टीसी काटने की धमकी भी दी गई।
ट्रैक्टर-ट्रॉली में स्टूडेंट को ले जाने का वीडियो सामने आया
इसी बीच इसी स्कूल के स्टूडेंट को ट्रैक्टर-ट्रॉली में बैठाकर ले जाने का एक वीडियो भी सामने आया है। वीडियो में स्टूडेंट ट्रैक्टर-ट्रॉली से उतरते दिखाई दे रहे हैं। ट्रॉली में उनके बैग के साथ अन्य सामान भी रखा नजर आया। वीडियो में स्टूडेंट से बातचीत के दौरान उनसे पूछा गया कि उन्हें कहां ले जाया जा रहा था और ट्रैक्टर-ट्रॉली में सामान क्यों रखा गया था। तो उन्होंने कहा कि उन्हें स्कूल से लाया गया था। इससे उनकी की सुरक्षा को लेकर गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं।
स्कूल परिसर में जगह-जगह कचरा, बाथरूम की हालत भी खराब
धरने के दौरान अभिभावकों ने स्कूल की साफ-सफाई और मूलभूत सुविधाओं पर भी सवाल उठाए। स्कूल परिसर में कई जगह कचरा पड़ा होने और बाथरूम की स्थिति खराब होने की शिकायत की। इसके अलावा टूटे नल, भवन की रंगाई-पुताई और रखरखाव की जरूरत को लेकर भी अभिभावकों ने नाराजगी जताई। उनका कहना है कि यदि स्कूल में पर्याप्त जगह उपलब्ध है तो स्टूडेंट को दूसरे स्कूल में भेजने के बजाय इसी परिसर में सुविधाओं को बेहतर किया जाना चाहिए।
स्कूल के बाहर स्पीड ब्रेकर की मांग
अभिभावकों ने स्कूल के बाहर सड़क पर स्पीड ब्रेकर और सुरक्षा के अन्य इंतजाम करने की भी मांग की। उनका कहना है कि सड़क पर वाहनों की आवाजाही रहती है, ऐसे में बच्चों की सुरक्षा के लिए यातायात नियंत्रित करने के इंतजाम जरूरी हैं। कुछ अभिभावकों और स्टूडेंट ने शिक्षकों के समय पर स्कूल पहुंचने को लेकर भी सवाल उठाए और आरोप लगाया कि कुछ शिक्षक निर्धारित समय पर नहीं पहुंचते, जिससे पढ़ाई प्रभावित होती है। अभिभावकों का कहना है कि वे बच्चों की पढ़ाई बंद कराने के पक्ष में नहीं हैं, बल्कि चाहते हैं कि स्टूडेंट को सुरक्षित माहौल और बेहतर सुविधाओं के साथ वर्तमान स्कूल में ही पढ़ाई का अवसर मिले।
क्या कहना है डीडीओ का
कुछ शिक्षक एसआईआर ड्यूटी में लगे हैं। छठी से आठवीं तक के बच्चों को दूसरे स्कूल भेजने के आदेश उच्च स्तर से मिले हैं। ट्रैक्टर-ट्रॉली में बच्चों को नहीं, बल्कि स्कूल का सामान शिफ्ट किया जा रहा था। जिस स्कूल में बच्चों को भेजा जा रहा है, वहां वे खुश हैं।
- सरोज, डीडीओ, राजकीय वरिष्ठ माध्यमिक विद्यालय

