Faridabad/Alive News: गणपति उत्सव को लेकर शहर के मंदिरों में तैयारियां शुरू हो गई हैं। इस बार कई जगहों पर गणपति की स्थापना के साथ विसर्जन के तरीके में भी बदलाव देखने को मिलेगा। एनआईटी-तिकोना पार्क स्थित मां वैष्णो देवी मंदिर में इको-फ्रेंडली गणेश प्रतिमा स्थापित की जाएगी और उत्सव के बाद बप्पा का विसर्जन मंदिर परिसर में ही पानी से भरे टब में किया जाएगा। वहीं, एनआईटी-5 स्थित बांके बिहारी मंदिर में भी इको-फ्रेंडली प्रतिमा स्थापित कर गणेश उत्सव मनाया जाएगा।
मां वैष्णो देवी मंदिर के प्रधान जगदीश भाटिया ने बताया कि मंदिर में गणेश चतुर्थी का आयोजन 14 सितंबर से शुरू होगा। गणपति की स्थापना के लिए मंदिर परिसर को विशेष रूप से सजाया जा रहा है। उत्सव के दौरान श्रद्धालुओं के लिए भजन-कीर्तन का आयोजन होगा। इसके लिए बाहर से भजन मंडली भी बुलाई जा रही है। गणपति को प्रतिदिन अलग-अलग तरह के मोदक और फलों का भोग लगाया जाएगा। पूजा के बाद भोग श्रद्धालुओं को प्रसाद के रूप में वितरित किया जाएगा।
जल स्रोतों को प्रदूषण से बचाने की पहल
मंदिर प्रबंधन के अनुसार गणपति की प्रतिमा इको-फ्रेंडली होगी। उत्सव पूरा होने के बाद प्रतिमा को कहीं बाहर ले जाकर विसर्जित करने के बजाय मंदिर परिसर में ही साफ पानी से भरे टब में विसर्जन किया जाएगा। इसके बाद विसर्जन से संबंधित प्रक्रिया भी मंदिर परिसर में ही पूरी की जाएगी। मंदिर प्रबंधन का कहना है कि इस पहल का उद्देश्य धार्मिक परंपरा के साथ पर्यावरण का ध्यान रखना है।
बांके बिहारी मंदिर में भी होगी विशेष पूजा
एनआईटी-5 स्थित बांके बिहारी मंदिर में भी गणेश चतुर्थी को लेकर तैयारियां चल रही हैं। मंदिर के पंडित विनोद शास्त्री ने बताया कि गणेश चतुर्थी के दिन मंदिर को फूलों और रंग-बिरंगे गुब्बारों से सजाया जाएगा। गणपति की प्रतिमा विशेष रूप से तैयार कराई जा रही है। प्रतिमा स्थापना के बाद विशेष पूजा-अर्चना की जाएगी।
बप्पा के मंदिर में विराजमान रहने तक प्रतिदिन भजन-कीर्तन का आयोजन किया जाएगा। गणपति को चढ़ाए जाने वाले भोग को पूजा के बाद श्रद्धालुओं में प्रसाद के रूप में बांटा जाएगा। मंदिर प्रबंधन के अनुसार उत्सव के दौरान सुबह से शाम तक श्रद्धालुओं के दर्शन के लिए पहुंचने की उम्मीद है।
पूजा के साथ पर्यावरण संरक्षण पर जोर
इस बार दोनों मंदिरों में गणपति उत्सव के दौरान पर्यावरण संरक्षण पर भी विशेष ध्यान दिया जा रहा है। इको-फ्रेंडली प्रतिमा से लेकर मंदिर परिसर में विसर्जन तक, आयोजकों की कोशिश धार्मिक आयोजन को पर्यावरण के अनुकूल बनाने की है। मंदिर प्रबंधन का कहना है कि श्रद्धालुओं को भी इस तरह के विसर्जन के लिए प्रेरित किया जाएगा, ताकि आस्था के साथ जल स्रोतों को प्रदूषण से बचाने का संदेश दिया जा सके।

