Faridabad/Alive News: रोज जिन शिक्षकों को स्टूडेंट क्लास में खड़े होकर पढ़ाते देखते हैं, शिक्षक दिवस पर वही कुर्सी स्टूडेंट ने संभाल ली। किसी ने ब्लैकबोर्ड पर पाठ समझाया, किसी ने बच्चों से सवाल पूछे तो किसी ने क्लास में अनुशासन बनाए रखने की कोशिश की। कुछ ही घंटों में शिक्षक की भूमिका निभाते-निभाते स्टूडेंट को एहसास हो गया कि क्लास के सामने खड़े होकर पढ़ाना जितना आसान दिखाई देता है, असल में उतना ही जिम्मेदारी भरा काम है।
ओल्ड फरीदाबाद स्थित नवोदय सरस्वती सीनियर सेकेंडरी स्कूल में शिक्षक दिवस पर आयोजित यह गतिविधि कार्यक्रम का सबसे खास आकर्षण रही। सीनियर क्लास के स्टूडेंट ने एक दिन के लिए शिक्षकों की भूमिका निभाई और जूनियर कक्षाओं में जाकर बच्चों को पढ़ाया। 12वीं कक्षा की छात्रा अवनी ने प्रिंसिपल की जिम्मेदारी संभाली। शिक्षक बनने के बाद स्टूडेंट को सिर्फ विषय पढ़ाने का मौका नहीं मिला, बल्कि उन्हें यह भी समझना पड़ा कि हर बच्चे की समझ अलग होती है। किसी को बार-बार समझाना पड़ता है तो किसी को क्लास में शांत कराना पड़ता है। समय पर पाठ पूरा करना, सवालों के जवाब देना और पूरी क्लास पर नजर रखना भी उनकी जिम्मेदारी का हिस्सा बना। यही वह अनुभव था, जिसने बच्चों को यह सोचने पर मजबूर किया कि शिक्षक सिर्फ पढ़ाने वाला व्यक्ति नहीं, बल्कि एक साथ कई जिम्मेदारियां निभाने वाला मार्गदर्शक होता है।
कार्यक्रम का शुभारंभ दीप प्रज्वलन के साथ हुआ। इसके बाद महान शिक्षाविद् और पूर्व राष्ट्रपति डॉ. सर्वपल्ली राधाकृष्णन के चित्र पर पुष्प अर्पित कर उन्हें श्रद्धांजलि दी गई। प्रसिद्ध समाजसेवी एवं युवा नेता करण सिंगला भी कार्यक्रम में स्टूडेंट का उत्साह बढ़ाने पहुंचे। उन्होंने स्टूडेंट द्वारा निभाई गई शिक्षक की भूमिका की सराहना की और उनके आत्मविश्वास व प्रयासों की प्रशंसा की।
किताब से बाहर मिली जिम्मेदारी की सीख
स्कूल प्रिंसिपल डॉ. गौरव पाराशर ने कहा कि इस तरह की गतिविधियों का उद्देश्य स्टूडेंट को किताबी ज्ञान से आगे ले जाकर जीवन के वास्तविक अनुभव देना है। जब स्टूडेंट स्वयं शिक्षक की भूमिका निभाते हैं तो उन्हें शिक्षक की मेहनत, धैर्य और जिम्मेदारी का महत्व समझ आता है।

