International/Alive News: नेपाल में ग्लेशियर टूटने के बाद आई भीषण बाढ़ से बड़े पैमाने पर नुकसान हुआ है। नेपाल और चीन के तिब्बत क्षेत्र में इस आपदा से 1200 से ज्यादा लोगों की मौत की बात सामने आई है। बाढ़ से सड़कें, पुल, शहर और कई हाइड्रोपावर प्रोजेक्ट प्रभावित हुए हैं।
आपदा के कुछ ही घंटों बाद भारत ने नेपाल के लिए राहत सामग्री भेजना शुरू कर दिया था। 3 सितंबर तक भारत पांच खेपों में कुल 74 टन राहत सामग्री नेपाल भेज चुका है। इसमें करीब 5 टन जरूरी दवाइयां शामिल हैं।
भारत की मदद केवल राहत सामग्री तक सीमित नहीं है। डॉक्टर, पैरामेडिक्स, बचाव दल, सुरंग विशेषज्ञ, बेली ब्रिज और फोरेंसिक विशेषज्ञ भी नेपाल भेजे गए हैं। इन टीमों की मदद से घायलों के इलाज, सुरंगों में फंसे लोगों की तलाश, टूटे संपर्क मार्गों को बहाल करने और शवों की पहचान का काम किया जा रहा है।
बाढ़ पीड़ितों के लिए अस्पताल बना सहारा
नेपाल के नुवाकोट में नेपाल-भारत मैत्री भवन बाढ़ प्रभावित लोगों के लिए राहत केंद्र बना हुआ है। यह इमारत ऊंचाई पर स्थित है, इसलिए बाढ़ के कारण घर छोड़ने वाले सैकड़ों लोगों ने यहां शरण ली।
भारत सरकार ने 2015 के भूकंप के बाद इस अस्पताल का पुनर्निर्माण कराया था। फिलहाल यहां 11 डॉक्टर बाढ़ प्रभावित लोगों का इलाज कर रहे हैं। जिले के अलग-अलग राहत केंद्रों से आने वाले लोगों को भी मेडिकल सहायता दी जा रही है।
बेली ब्रिज से टूटे रास्ते जोड़ने की तैयारी
बाढ़ में कई सड़कें और पुल बह जाने से दूरदराज के इलाकों का संपर्क टूट गया है। इसे जल्द बहाल करने के लिए भारत नेपाल को बेली ब्रिज उपलब्ध करा रहा है।
बेली ब्रिज लोहे के हिस्सों से तैयार किया जाने वाला अस्थायी पुल होता है। इसके हिस्सों को प्रभावित क्षेत्र में ले जाकर मौके पर जोड़ा जा सकता है। भारतीय दूतावास के अनुसार, 230 फीट लंबे सिंगल-लेन मॉड्यूलर स्टील ब्रिज के उपकरण लेकर 16 ट्रक नेपाल पहुंच चुके हैं। सात और बेली ब्रिज के लिए उपकरण भेजे जाने हैं। इन्हें लगाने में मदद के लिए तकनीकी टीमें भी नेपाल पहुंचेंगी।
हाइड्रोपावर सुरंगों में फंसे लोगों की तलाश
बाढ़ के बाद नेपाल के सामने बड़ी चुनौती हाइड्रोपावर सुरंगों में फंसे कर्मचारियों को तलाशना है। नेपाल सरकार के अनुसार कई सुरंगों में 900 से ज्यादा कर्मचारियों के फंसे होने की आशंका है।
30 अगस्त को भारतीय सुरंग बचाव विशेषज्ञों की टीम नेपाल पहुंची। यह टीम नेपाली सेना के साथ मिलकर चिलिमे और लांगटांग के प्रभावित क्षेत्रों में सुरंगों के अंदर फंसे लोगों की तलाश कर रही है।
दिल्ली-एनसीआर की रैट माइनर्स टीम ने भी नेपाल के बचाव अभियान में मदद की पेशकश की है। इसी टीम ने 2023 में उत्तराखंड की सिलक्यारा सुरंग में फंसे 41 मजदूरों को बाहर निकालने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी।
शवों की पहचान के लिए DNA जांच
बाढ़ का पानी कम होने के बाद नेपाल के सामने बरामद शवों और लापता लोगों की पहचान की चुनौती भी है। इसके लिए भारत ने 19 सदस्यीय फोरेंसिक टीम नेपाल भेजी है।
भारतीय विशेषज्ञ नेपाली टीम के साथ DNA सैंपल की जांच कर रहे हैं। यह काम काठमांडू घाटी की दो प्रयोगशालाओं में किया जा रहा है। नेपाल पुलिस के अनुसार मंगलवार शाम तक 1,068 शव बरामद किए जा चुके थे। इनमें करीब 400 मामलों में केवल शरीर के कुछ हिस्से मिले हैं। ऐसे मामलों में DNA जांच से मृतकों की पहचान करने में मदद मिलेगी।
बाढ़ से क्षतिग्रस्त स्कूल का भी होगा पुनर्निर्माण
भारत ने नुवाकोट के बिदुर में बाढ़ से क्षतिग्रस्त त्रिभुवन त्रिशूली सेकेंडरी स्कूल के पुनर्निर्माण का भी फैसला किया है। नई इमारत भारत के हाई इम्पैक्ट कम्युनिटी डेवलपमेंट प्रोग्राम के तहत बनाई जाएगी।
भारत इससे पहले भी नेपाल समेत कई पड़ोसी देशों में आपदा के दौरान राहत और बचाव कार्यों में मदद करता रहा है। 2015 के नेपाल भूकंप के बाद भारत ने ऑपरेशन मैत्री के तहत राहत और बचाव अभियान चलाया था। वहीं, म्यांमार में आए विनाशकारी भूकंप के बाद ऑपरेशन ब्रह्मा के जरिए सहायता पहुंचाई गई थी।
नेपाल में इस बार भी भारत की सहायता राहत सामग्री तक सीमित नहीं है। मेडिकल टीमों से लेकर सुरंग विशेषज्ञों, बेली ब्रिज और फोरेंसिक टीमों तक भारत अलग-अलग स्तर पर राहत, बचाव और पुनर्निर्माण में सहयोग कर रहा है।

