International/Alive News: रूस-यूक्रेन युद्ध में ब्लैक सी एक बार फिर बड़ा युद्ध क्षेत्र बन गया है। पिछले करीब डेढ़ महीने में दोनों देशों की ओर से 300 से ज्यादा जहाजों को निशाना बनाए जाने की खबर है। इनमें अनाज ले जाने वाले जहाज, तेल टैंकर और दूसरे मालवाहक पोत शामिल हैं।
लगातार हो रहे हमलों का असर ब्लैक सी के समुद्री व्यापार पर पड़ रहा है। जहाज मालिक इस रूट पर जाने से बच रहे हैं, जिससे माल ढुलाई की लागत बढ़ रही है। अगर यह स्थिति लंबे समय तक जारी रही तो इसका असर वैश्विक खाद्य सप्लाई पर पड़ सकता है। गेहूं और मक्का की कीमतों में भी तेजी आने की आशंका है।
रूस और यूक्रेन मिलकर दुनिया के करीब 30% गेहूं निर्यात में हिस्सेदारी रखते हैं। दोनों देशों से होने वाला अनाज निर्यात काफी हद तक ब्लैक सी के रास्ते दूसरे देशों तक पहुंचता है।
रूस का अनाज निर्यात 71% घटा
आंकड़ों के मुताबिक, अगस्त में रूस का कुल अनाज निर्यात पिछले साल के 59 लाख टन से घटकर करीब 17 लाख टन रह गया। यानी इसमें लगभग 71% की गिरावट आई। रूस का गेहूं निर्यात भी 50 लाख टन से घटकर करीब 13 लाख टन रह गया। रूसी गेहूं खरीदने वाले देशों की संख्या 43 से घटकर 16 रह गई है। इसी तरह रूस से अनाज भेजने वाले बंदरगाहों की संख्या भी 47 से घटकर 10 रह गई। रूस के प्रमुख बंदरगाह नोवोरोसिस्क से अनाज शिपमेंट 24.9 लाख टन से घटकर 10.4 लाख टन रह गया।
एक साल में गेहूं करीब 30% महंगा
बंदरगाहों और जहाजों पर हमलों के कारण समुद्री रास्ते से अनाज की सप्लाई प्रभावित हो रही है। रूस और यूक्रेन के पास अनाज का भंडार मौजूद होने के बावजूद उसे दूसरे देशों के खरीदारों तक पहुंचाने में दिक्कत आ रही है।
इसका असर अंतरराष्ट्रीय बाजार में भी दिखाई दे रहा है। गेहूं की कीमतें पिछले एक साल में करीब 30% बढ़ चुकी हैं। यदि समुद्री सप्लाई में बाधा बनी रहती है तो कीमतों पर और दबाव पड़ सकता है।
यूक्रेन ने सड़क और रेल से निर्यात बढ़ाया
ब्लैक सी का समुद्री रास्ता प्रभावित होने के बाद यूक्रेन सड़क और रेल के जरिए अनाज का निर्यात कर रहा है। हालांकि इन रास्तों की क्षमता समुद्री बंदरगाहों की तुलना में काफी कम है। यूक्रेन डेन्यूब नदी के रास्ते भी सीमित मात्रा में अनाज भेज रहा है। लेकिन जलस्तर और परिवहन क्षमता जैसी समस्याओं के कारण यह विकल्प ब्लैक सी के समुद्री मार्ग की पूरी भरपाई नहीं कर पा रहा है।
मक्का की सप्लाई पर भी असर का खतरा
ब्लैक सी में बढ़ते तनाव से सिर्फ गेहूं ही नहीं, बल्कि मक्का की वैश्विक सप्लाई भी प्रभावित हो सकती है। 2025-26 में यूक्रेन ने करीब 2.3 करोड़ टन मक्का निर्यात किया था, जो दुनिया के कुल मक्का निर्यात का लगभग 12% था। अगर मौजूदा हालात लंबे समय तक बने रहे तो अंतरराष्ट्रीय बाजार में मक्का की उपलब्धता कम हो सकती है और इसकी कीमतों पर भी दबाव बढ़ सकता है।
ब्लैक सी क्यों है महत्वपूर्ण?
ब्लैक सी दुनिया के प्रमुख समुद्री व्यापार मार्गों में शामिल है। रूस और यूक्रेन से गेहूं, मक्का और सूरजमुखी तेल का बड़ा हिस्सा इसी रास्ते से दूसरे देशों तक पहुंचता है। दोनों देश मिलकर वैश्विक गेहूं निर्यात का करीब 30% हिस्सा रखते हैं। इसलिए ब्लैक सी में किसी भी तरह की लंबी रुकावट का सीधा असर दुनिया के खाद्य बाजार पर पड़ सकता है।
2022 में भी बढ़ी थीं खाद्य कीमतें
2022 में रूस-यूक्रेन युद्ध शुरू होने के बाद ब्लैक सी से अनाज निर्यात प्रभावित हुआ था। इससे दुनियाभर में खाद्य कीमतों में तेज बढ़ोतरी देखने को मिली थी। बाद में संयुक्त राष्ट्र और तुर्किये की मध्यस्थता से ब्लैक सी ग्रेन डील लागू हुई। इसके जरिए बड़ी मात्रा में अनाज को अंतरराष्ट्रीय बाजार तक पहुंचाने में मदद मिली थी।
अब ब्लैक सी में जहाजों और बंदरगाहों पर फिर से हमले बढ़ने से वैश्विक खाद्य आपूर्ति को लेकर चिंता बढ़ गई है। अगर समुद्री मार्ग लंबे समय तक बाधित रहा तो गेहूं, मक्का और खाद्य तेल की कीमतों में एक बार फिर तेजी आ सकती है। इसका सबसे ज्यादा असर उन देशों पर पड़ सकता है जो रूस और यूक्रेन से होने वाले अनाज निर्यात पर निर्भर हैं।

