August 30, 2026

न्यूयॉर्क में मोहन भागवत बोले- भारत के DNA में एकता और विविधता, सही सोच इंसान को भगवान के करीब ले जाती है

न्यूयॉर्क के मैडिसन स्क्वायर गार्डन में भाषण देते RSS प्रमुख मोहन भागवत

International/Alive News: राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) के प्रमुख मोहन भागवत ने शनिवार रात न्यूयॉर्क के मैडिसन स्क्वायर गार्डन में करीब 42 मिनट भाषण दिया। उन्होंने कहा कि एकता और विविधता भारत के DNA में है। भारत में लोग अलग-अलग दिखते हैं और उनके रहने, खाने-पीने व जीवन जीने के तरीके भी अलग हो सकते हैं, लेकिन इसके बावजूद सभी के बीच एक स्वाभाविक जुड़ाव है।

भागवत ने कहा कि विविधता में एकता भारत की पारंपरिक सोच रही है और देश अलग-अलग समय पर पूरी दुनिया को इसका अहसास कराता रहा है। उन्होंने कहा कि सोचने की क्षमता इंसान के लिए एक बड़ा वरदान है। सही सोच इंसान को भगवान के करीब ले जाती है, जबकि गलत सोच उसे जानवरों के करीब ले जाती है।

न्यूयॉर्क के मैडिसन स्क्वायर गार्डन में आयोजित ‘यूनिवर्सल वननेस सेलिब्रेशन’ कार्यक्रम में 5,000 से ज्यादा भारतीय मूल के अमेरिकी शामिल हुए। कार्यक्रम का आयोजन अमेरिकन हिंदूज फॉर एंगेजमेंट एंड डायलॉग (AHEAD) ने किया था। इसमें 30 देशों के करीब 180 धार्मिक नेता भी शामिल हुए।

मोहन भागवत ने धर्म को लेकर कहा कि भारत में धर्म को केवल पूजा-पाठ या किसी धार्मिक पहचान के तौर पर नहीं समझना चाहिए। धर्म ऐसी व्यवस्था है, जो जीवन और ब्रह्मांड को संतुलित रखने में मदद करती है। उन्होंने कहा कि जीवन में अलग-अलग परिस्थितियां आती रहती हैं और धर्म इन परिस्थितियों के बीच संतुलन बनाए रखने की दिशा दिखाता है।

उन्होंने कहा कि पैसा, सामान और दूसरी भौतिक सुविधाएं जीवन में जरूरी हो सकती हैं, लेकिन इनसे हमेशा खुशी और संतुष्टि नहीं मिलती। भौतिक सुख स्थायी नहीं होता। किसी व्यक्ति के पास बहुत सारी सुविधाएं होने के बावजूद उसके जीवन में संतुष्टि की कमी हो सकती है। इसलिए जीवन में केवल भौतिक उपलब्धियों को ही सफलता का पैमाना नहीं मानना चाहिए।

अमेरिका में रहने वाले भारतीय मूल के लोगों से भागवत ने कहा कि उनकी पहली जिम्मेदारी अपनी कर्मभूमि के प्रति है। उन्होंने कहा कि जिस देश में व्यक्ति रह रहा है और काम कर रहा है, उसके प्रति ईमानदार और जिम्मेदार रहना चाहिए। उन्होंने भारतीय समुदाय से समाज और देश के प्रति अपनी जिम्मेदारियों को समझने की अपील की।

भागवत ने भारतीय जीवन परंपरा में बताए गए चार चरणों का भी उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि जीवन में ब्रह्मचर्य, गृहस्थ, वानप्रस्थ और संन्यास जैसे चरण होते हैं। पहले सीखना और खुद को तैयार करना, फिर परिवार और समाज की जिम्मेदारियां निभाना और बाद में अपने अनुभवों को अगली पीढ़ी तक पहुंचाना जरूरी है। उन्होंने कहा कि जीवन के हर पड़ाव की अपनी जिम्मेदारी होती है और उसे सही तरीके से निभाना चाहिए।

उन्होंने कहा कि वास्तविक प्रगति तभी संभव है, जब व्यक्ति, समाज और पर्यावरण तीनों का विकास साथ-साथ हो। विकास के नाम पर न तो व्यक्ति को दबाया जाना चाहिए और न ही समाज या पर्यावरण की अनदेखी करनी चाहिए। उन्होंने संतुलित विकास और आपसी जुड़ाव को बेहतर समाज के लिए जरूरी बताया।