August 26, 2026

मिसकैरेज की छुट्टी को मातृत्व अवकाश में नहीं जोड़ सकते, महिला कर्मचारी के हक में हाईकोर्ट का बड़ा फैसला

मिसकैरेज और मातृत्व अवकाश पर छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट का बड़ा फैसला

Chhattisgarh/Alive News: छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने महिला कर्मचारियों के मातृत्व अधिकारों को लेकर अहम फैसला सुनाया है। कोर्ट ने स्पष्ट किया कि मिसकैरेज के दौरान लिया गया अवकाश और बाद की गर्भावस्था के लिए मिलने वाला मातृत्व अवकाश अलग-अलग अधिकार हैं। इन्हें एक-दूसरे में समायोजित नहीं किया जा सकता।

कोर्ट ने यह भी कहा कि केवल कर्मचारी के लीव बैलेंस में छुट्टी कम होने के आधार पर उसे मातृत्व लाभ से वंचित नहीं किया जा सकता। इस फैसले को कामकाजी महिलाओं के अधिकारों की सुरक्षा के लिहाज से महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

FCI की अपील खारिज

यह मामला फूड कॉरपोरेशन ऑफ इंडिया (FCI) की महिला कर्मचारी किरण गौतम शर्मा से जुड़ा है। मामले की सुनवाई चीफ जस्टिस रमेश सिन्हा और जस्टिस रविंद्र कुमार अग्रवाल की डिवीजन बेंच ने की। कोर्ट ने FCI की अपील खारिज करते हुए सिंगल बेंच के फैसले को बरकरार रखा।

सिंगल बेंच ने महिला कर्मचारी को मिसकैरेज और मातृत्व अवकाश से जुड़े लाभ देने के निर्देश दिए थे।

जुड़वा गर्भावस्था में हुई थी परेशानी

किरण गौतम शर्मा वर्ष 2019 में जुड़वा बच्चों की गर्भवती थीं। 25 अप्रैल 2019 को गर्भावस्था के दौरान स्वास्थ्य संबंधी जटिलता के कारण एक भ्रूण का मिसकैरेज हो गया। दूसरे भ्रूण की स्थिति को डॉक्टरों ने हाई रिस्क बताया और उन्हें लंबे समय तक बेड रेस्ट की सलाह दी।

इसके बाद 3 सितंबर 2019 को उन्होंने एक बच्ची को जन्म दिया।

68 दिन की छुट्टी को FCI ने माना एक्स्ट्रा ऑर्डिनरी लीव

महिला कर्मचारी ने मिसकैरेज और बाद की गर्भावस्था के दौरान नियमानुसार छुट्टी और इलाज के खर्च की प्रतिपूर्ति की मांग की थी।

FCI ने उनके 68 दिनों के अवकाश को एक्स्ट्रा ऑर्डिनरी लीव मान लिया। इस अवधि का वेतन नहीं दिया गया और वेतन से 80,254 रुपये की कटौती भी कर ली गई।

इसके बाद कर्मचारी ने अदालत का रुख किया।

सिंगल बेंच ने महिला कर्मचारी को दी राहत

हाईकोर्ट की सिंगल बेंच ने 13 मई 2026 को महिला कर्मचारी के पक्ष में फैसला सुनाया। कोर्ट ने कहा कि उन्हें मिसकैरेज और मातृत्व अवकाश का लाभ दिया जाना चाहिए।

अदालत ने कुल 90 दिन के अवकाश का लाभ देने और वेतन से काटी गई राशि वापस करने के निर्देश दिए। वहीं, मेडिकल खर्च की प्रतिपूर्ति के मामले में संबंधित प्राधिकरण को नियमों के अनुसार दोबारा फैसला लेने को कहा गया।

लीव बैलेंस कम होने का तर्क नहीं चलेगा

FCI ने सिंगल बेंच के आदेश को डिवीजन बेंच में चुनौती दी थी। संस्था ने लीव बैलेंस और अवकाश नियमों का हवाला दिया, लेकिन डिवीजन बेंच ने इन तर्कों को स्वीकार नहीं किया।

कोर्ट ने कहा कि मातृत्व लाभ का उद्देश्य महिला कर्मचारी के स्वास्थ्य, सम्मान और कल्याण की रक्षा करना है। ऐसे वैधानिक अधिकारों को केवल तकनीकी या प्रशासनिक आधार पर सीमित नहीं किया जा सकता।

अदालत ने यह भी स्पष्ट किया कि कर्मचारी के खाते में पर्याप्त छुट्टी नहीं होने के आधार पर मातृत्व लाभ से इनकार नहीं किया जा सकता।

80,254 रुपये की वेतन कटौती भी गलत

हाईकोर्ट ने माना कि जब महिला कर्मचारी संबंधित अवकाश की कानूनी रूप से हकदार है, तो केवल लीव बैलेंस कम होने के आधार पर उसके वेतन से की गई 80,254 रुपये की कटौती को सही नहीं ठहराया जा सकता।

मेडिकल बिलों के मामले में कोर्ट ने संबंधित प्राधिकरण को दस्तावेजों की जांच कर नियमों के अनुसार नए सिरे से फैसला लेने का निर्देश दिया है।