New Delhi/Alive News: सुप्रीम कोर्ट ने हैदराबाद की लॉ यूनिवर्सिटी NALSAR से जुड़े विवाद में बार काउंसिल ऑफ इंडिया (BCI) के कदम पर नाराजगी जताई है। CJI जस्टिस सूर्यकांत ने कहा कि छात्रों और उनके बीच हुई बातचीत में BCI को दखल देने की जरूरत नहीं थी।
CJI ने NALSAR के 2026 बैच के छात्रों का वकील के तौर पर एनरोलमेंट रोकने के BCI के शुरुआती आदेश को भी बेवजह बताया। उन्होंने कहा कि छात्रों ने अगर गलत फैसला लिया भी हो या उन्हें किसी ने गलत सलाह दी हो, तब भी उन्हें शांतिपूर्ण तरीके से अपनी बात रखने और विरोध करने का अधिकार है।
सुप्रीम कोर्ट ने BCI को नोटिस जारी किया है। साथ ही NALSAR के किसी छात्र या फैकल्टी के खिलाफ दंडात्मक कार्रवाई नहीं करने का आदेश दिया है।
छात्रों ने CJI को चीफ गेस्ट बनाने का विरोध किया था
NALSAR यानी नेशनल एकेडमी ऑफ लीगल स्टडीज एंड रिसर्च, हैदराबाद की प्रमुख लॉ यूनिवर्सिटी है। यहां करीब 1,400 छात्र पढ़ते हैं। 2026 के दीक्षांत समारोह में करीब 450 छात्रों ने CJI जस्टिस सूर्यकांत को चीफ गेस्ट बनाए जाने का विरोध किया था।
छात्रों ने यूनिवर्सिटी प्रशासन को पत्र देकर CJI का निमंत्रण वापस लेने की मांग की थी। छात्रों की आपत्ति CJI की उन टिप्पणियों को लेकर थी, जो दिल्ली में NEET प्रदर्शन के दौरान पुलिस कार्रवाई से जुड़ी याचिका की सुनवाई के समय सामने आई थीं।
BCI ने पहले एनरोलमेंट रोकने का आदेश दिया था
13 अगस्त को BCI ने सभी स्टेट बार काउंसिलों को निर्देश दिया था कि NALSAR के 2026 बैच के किसी भी ग्रेजुएट का अगले आदेश तक वकील के तौर पर एनरोलमेंट न किया जाए।
BCI ने NALSAR के वाइस चांसलर से तीन दिन के भीतर रिपोर्ट भी मांगी थी। रिपोर्ट में उन लोगों की पहचान करने को कहा गया था, जिन्होंने कथित तौर पर अभियान शुरू करने, उसका ड्राफ्ट तैयार करने, छात्रों को जोड़ने, मीडिया से संपर्क करने और ऑनलाइन ग्रुप चलाने में मुख्य भूमिका निभाई।
BCI ने अपने शुरुआती आदेश में कहा था कि कानून के छात्रों से देश के सर्वोच्च न्यायिक पद के प्रति सम्मान की उम्मीद की जाती है। काउंसिल ने कुछ शिक्षकों पर छात्रों को अभियान के लिए उकसाने का आरोप भी लगाया था।
कुछ घंटे बाद BCI ने बदला फैसला
BCI ने आदेश जारी होने के कुछ घंटे बाद अपना रुख बदल दिया। काउंसिल ने कहा कि NALSAR के ज्यादातर छात्र निर्दोष हैं और वे CJI के अनादर वाले किसी अभियान में शामिल नहीं थे।
इसके बाद सभी 2026 बैच के छात्रों को अपनी पसंद की स्टेट बार काउंसिल में एनरोल होने की अनुमति दे दी गई। हालांकि, BCI ने कहा था कि वह यूनिवर्सिटी के वाइस चांसलर की रिपोर्ट का इंतजार करेगी और रिपोर्ट के आधार पर आगे की कार्रवाई पर फैसला लिया जाएगा।
SCBA ने भी BCI की कार्रवाई पर सवाल उठाए
सुप्रीम कोर्ट बार एसोसिएशन (SCBA) के अध्यक्ष और वरिष्ठ वकील विकास सिंह ने भी BCI के शुरुआती आदेश पर सवाल उठाए थे। उन्होंने कार्रवाई को मनमाना और जरूरत से ज्यादा बताते हुए कहा था कि छात्रों को अपनी बात रखने के कारण वकालत में प्रवेश से वंचित करने की धमकी नहीं दी जानी चाहिए।
इस पूरे विवाद में अब सुप्रीम कोर्ट के हस्तक्षेप के बाद BCI की कार्रवाई पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं।

