August 7, 2026

केंद्र का सुप्रीम कोर्ट में हलफनामा- SC-ST आरक्षण में क्रीमी लेयर लागू नहीं: सरकार बोली- यह नियम सिर्फ OBC और SEBC पर लागू

SC-ST आरक्षण में क्रीमी लेयर लागू करने की मांग वाली याचिकाओं का केंद्र सरकार ने सुप्रीम कोर्ट में विरोध किया है।

New Delhi/Alive News: केंद्र सरकार ने सुप्रीम कोर्ट में दाखिल हलफनामे में कहा है कि अनुसूचित जाति (SC) और अनुसूचित जनजाति (ST) के आरक्षण में क्रीमी लेयर का सिद्धांत लागू नहीं होता। सरकार ने SC-ST आरक्षण में क्रीमी लेयर लागू करने की मांग वाली जनहित याचिकाओं (PIL) का विरोध किया है और इन्हें खारिज करने की मांग की है।

सामाजिक न्याय और अधिकारिता मंत्रालय ने अपने हलफनामे में कहा कि मौजूदा कानून में ऐसा कोई प्रावधान नहीं है, जिसके तहत SC-ST आरक्षण में क्रीमी लेयर का नियम लागू किया जा सके। केंद्र के मुताबिक, क्रीमी लेयर की अवधारणा OBC और SEBC आरक्षण से जुड़ी है।

क्या है पूरा मामला?

सुप्रीम कोर्ट ने 11 अगस्त 2025 को रमाशंकर प्रजापति और अन्य की जनहित याचिकाओं पर केंद्र और राज्य सरकारों को नोटिस जारी किया था।

याचिकाओं में मांग की गई है कि ऐसे SC-ST परिवारों को आरक्षण के लाभ से बाहर किया जाए, जिनके परिवार का कोई सदस्य पहले ही संवैधानिक या वरिष्ठ सरकारी पद हासिल कर चुका है।

याचिकाकर्ताओं का तर्क है कि इससे आरक्षण का लाभ उन SC-ST परिवारों तक ज्यादा प्रभावी ढंग से पहुंच सकेगा, जो अभी भी सामाजिक और आर्थिक रूप से कमजोर हैं।

याचिकाओं में SC-ST के भीतर उप-श्रेणियां यानी सब-कैटेगरी बनाने और आर्थिक रूप से कमजोर लोगों को शिक्षा में प्रवेश और सरकारी नौकरियों में प्राथमिकता देने की मांग भी की गई है।

केंद्र बोला- SC-ST सूची में बदलाव संसद ही कर सकती है

केंद्र ने कहा कि SC और ST की संवैधानिक सूची में किसी जाति या जनजाति को शामिल करने या हटाने का अधिकार संसद के पास है।

सरकार ने संविधान के अनुच्छेद 341 और 342 का हवाला देते हुए कहा कि राज्यों या किसी अन्य संस्था को इन सूचियों में बदलाव करने का अधिकार नहीं है।

आरक्षण सिर्फ आर्थिक आधार पर तय नहीं होता

केंद्र ने इंदिरा साहनी यानी मंडल आयोग मामले का हवाला देते हुए कहा कि SC, ST और OBC जैसी श्रेणियों की पहचान केवल आर्थिक स्थिति के आधार पर नहीं होती।

सरकार के मुताबिक, इन वर्गों की पहचान के पीछे ऐतिहासिक, सामाजिक और शैक्षिक पिछड़ापन भी महत्वपूर्ण आधार हैं।

कल्याणकारी योजनाओं में पहले से आय सीमा

केंद्र ने यह भी बताया कि SC, ST और SEBC के लिए चलने वाली कई कल्याणकारी योजनाओं में पहले से ही आय सीमा तय है। इसका उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि योजनाओं का लाभ जरूरतमंद लोगों तक पहुंचे।

सरकार ने कहा कि याचिकाकर्ताओं ने यह स्पष्ट नहीं किया है कि किन योजनाओं में बदलाव की जरूरत है और प्रस्तावित बदलावों से गरीबी रेखा से नीचे रहने वाले लोगों को किस तरह सीधा लाभ मिलेगा।

अब सुप्रीम कोर्ट इन याचिकाओं और केंद्र के जवाब पर आगे सुनवाई करेगा।