Noida/Alive News: नोएडा के सरकारी स्कूलों में बुनियादी सुविधाओं की कमी साफ नजर आ रही है। बजट होने के बावजूद कक्षाओं की संख्या कम है। शौचालय जीर्ण-शीर्ण हालत में हैं और रास्तों व छतों से पानी टपकता है। एक ही कमरे में कई क्लासें चलाने और ज्यादा छात्र होने की वजह से पढ़ाई प्रभावित हो रही है और इससे बच्चों की सुरक्षा व शैक्षिक गुणवत्ता पर गंभीर सवाल उठ रहे हैं।
स्कूलों में बच्चों को सुविधाएं देने के सरकारी दावे केवल कागजों तक सीमित लगते हैं। हर साल मरम्मत और सुधार के लिए फंड आवंटित किया जाता है, पर जमीन पर कोई बदलाव नजर नहीं आता। प्रदेश का मॉडल कहा जाने वाला नोएडा भी बच्चों को बुनियादी सुविधाएं मुहैया कराने में नाकाम साबित हो रहा है। नोएडा के गढ़ी चौखंडी गांव के प्राथमिक और बहलोलपुर गांव के उच्च प्राथमिक स्कूलों में बेहतरीन अव्यवस्था देखने को मिली। स्कूलों में कहीं कक्षाओं की संख्या कम है तो कहीं शौचालय टूटे पड़े हैं। परिसर में डस्टबिन मौजूद होने के बावजूद कचरा जमीन पर फैला हुआ दिखा। एक ही कमरे में तीन अलग-अलग कक्षाओं के छात्र बैठाए गए थे, जिसका कारण कक्षाओं की कमी बताया गया।
कक्षा में 90-95 बच्चे पढ़ते हैं
कई स्कूलों में छात्रों की संख्या इतनी ज्यादा है कि एक ही कक्षा में 90-95 बच्चे पढ़ते हैं, जबकि मानक के मुताबिक एक कक्षा में अधिकतम 40 विद्यार्थी होने चाहिए। इतनी भीड़ होने के कारण शिक्षक की बात हर बच्चे तक पहुंच ही नहीं पाती। कैंपस में आंगनवाड़ी केंद्र भी चल रहा है और वहां बाहरी लोगों का आवागमन बना रहता है। इससे पढ़ाई में व्यवधान होता है और बच्चों की सुरक्षा भी खतरे में रहती है।

