Noida/Alive News: एनसीआर में 10 वर्ष पुराने डीजल तथा 15 वर्ष पुराने पेट्रोल और सीएनजी वाहनों के संचालन पर रोक और उनके स्वत: डी-रजिस्ट्रेशन को लेकर वाहन मालिकों के बीच असमंजस की स्थिति बनी हुई है। मोटर वाहन अधिनियम, 1988 (CMVA 1988) और केंद्रीय मोटर वाहन नियम, 1989 (CMVR 1989) का हवाला देते हुए कई लोग सवाल उठा रहे हैं कि इनमें “Deregister (डी-रजिस्टड )” शब्द का स्पष्ट उल्लेख नहीं है। उनका कहना है कि यह स्पष्ट किया जाना चाहिए कि राष्ट्रीय सूचना विज्ञान केंद्र (NIC) के पोर्टल पर “डी-रजिस्टड की व्यवस्था किस कानूनी प्रावधान के आधार पर जोड़ी गई है।
वर्तमान व्यवस्था के तहत एनसीआर में 10 वर्ष पुराने डीजल तथा 15 वर्ष पुराने पेट्रोल और सीएनजी वाहनों की निर्धारित अवधि पूरी होते ही उनका पंजीकरण स्वत: निष्प्रभावी हो जाता है। इसके कारण वाहन मालिकों को वाहन चलाने, बेचने, स्थानांतरित करने और अन्य प्रक्रियाओं में कठिनाइयों का सामना करना पड़ रहा है।
प्रभावित वाहन मालिकों का कहना है कि उन्हें इस प्रक्रिया और समय-सीमा की पर्याप्त जानकारी नहीं मिल सकी। कई लोगों को तब पता चला जब उनके वाहन का रजिस्टड स्वत: समाप्त हो गया। उनका कहना है कि यदि समय रहते व्यापक प्रचार-प्रसार और सूचना दी जाती, तो वे अपनी गाड़ियों को अधिकृत स्क्रैपिंग सेंटर पर जमा कर आवश्यक प्रक्रिया पूरी कर सकते थे।
वाहन मालिकों ने भारत सरकार और सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय (MoRTH) से मांग की है कि इस व्यवस्था में एकमुश्त अतिरिक्त समय (ग्रेस पीरियड) दिया जाए, ताकि जिन वाहनों का हाल ही में डी-रजिस्टड हुआ है, उनके मालिक बिना अनावश्यक परेशानी के अपनी गाड़ियों को अधिकृत स्क्रैपिंग सेंटर पर जमा कर सकें। उनका कहना है कि इससे आम लोगों को राहत मिलेगी और वाहन स्क्रैपिंग नीति का उद्देश्य भी सुचारु रूप से पूरा हो सकेगा।

