June 10, 2026

TMC के बागियों से बढ़ती नजदीकी पर BJP में हलचल, नेताओं ने कहा- पार्टी में नहीं होगी एंट्री

दिल्ली में TMC के बागी सांसदों और BJP नेताओं के बीच हुई बैठक पर चर्चा करते राजनीतिक नेता।

Kolkata/Alive News: पश्चिम बंगाल की राजनीति में उस समय नई हलचल शुरू हो गई जब तृणमूल कांग्रेस (TMC) के बागी सांसदों ने दिल्ली में पार्टी की वरिष्ठ सांसद शताब्दी रॉय के आवास पर बैठक की। इससे पहले यही समूह केंद्रीय मंत्री भूपेंद्र यादव के घर भी पहुंचा था। इन मुलाकातों के बाद बंगाल की राजनीति में नए समीकरण बनने की अटकलें तेज हो गई हैं।

BJP को होगा फायदा या नुकसान?

राजनीतिक गलियारों में सवाल उठ रहे हैं कि क्या TMC के बागियों के साथ बढ़ती नजदीकी से BJP को राजनीतिक नुकसान हो सकता है। कुछ लोग इसे पार्टी की उस छवि के खिलाफ मान रहे हैं जिसमें TMC नेताओं पर भ्रष्टाचार और सिंडिकेट राज के आरोप लगाए जाते रहे हैं।

हालांकि BJP के वरिष्ठ नेता और पूर्व राज्य अध्यक्ष तथागत रॉय ने कहा कि इससे पार्टी की छवि या कार्यकर्ताओं के मनोबल पर कोई असर नहीं पड़ेगा। उन्होंने कहा कि BJP ने स्पष्ट कर दिया है कि किसी भी TMC नेता को पार्टी में शामिल नहीं किया जाएगा।

बंगाल BJP अध्यक्ष ने दोहराया रुख

पश्चिम बंगाल BJP अध्यक्ष सामिक भट्टाचार्य ने कहा कि TMC नेताओं के लिए BJP के दरवाजे बंद हैं। उन्होंने कहा कि BJP कोई “बैंड पार्टी” नहीं बल्कि एक राजनीतिक संगठन है और भ्रष्टाचार के आरोपों से घिरे नेताओं को पार्टी में शामिल नहीं किया जाएगा।

BJP नेताओं का दावा- बागियों की जरूरत नहीं

पार्टी के एक वरिष्ठ नेता ने नाम न छापने की शर्त पर कहा कि BJP को सरकार चलाने के लिए किसी बागी विधायक या सांसद की जरूरत नहीं है। उन्होंने कहा कि पार्टी जनता के जनादेश से सत्ता में आई है और उसका लक्ष्य बंगाल में TMC की राजनीतिक ताकत को कमजोर करना है।

नेता ने यह भी कहा कि आगामी निकाय चुनाव और 2029 के राजनीतिक मुकाबले को देखते हुए यह रणनीति बनाई गई है।

TMC ने बागी नेताओं पर साधा निशाना

TMC सांसद कल्याण बनर्जी ने बागी नेताओं पर हमला बोलते हुए कहा कि पार्टी ऐसे “दोहरे चरित्र वाले” नेताओं के जाने से खुश है। उन्होंने कहा कि पार्टी अब लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला के फैसले का इंतजार कर रही है, जिसके बाद आगे की कानूनी कार्रवाई तय की जाएगी।

फर्जी हस्ताक्षर विवाद से बढ़ा राजनीतिक संकट

पूरा विवाद तब शुरू हुआ जब TMC के राष्ट्रीय महासचिव अभिषेक बनर्जी ने विधानसभा अध्यक्ष को कुछ पत्र सौंपे और उनके फर्जी हस्ताक्षरों को लेकर विवाद खड़ा हो गया। मामले की जांच अब राज्य के CID विभाग द्वारा की जा रही है।

इस घटनाक्रम ने TMC के अंदर चल रहे मतभेदों को खुलकर सामने ला दिया है और इसका असर राज्य की राजनीति के साथ-साथ संसद तक पहुंचता दिखाई दे रहा है।