June 6, 2026

शरणागति से ही परमात्मा की कृपा संभव: स्वामी पुरुषोत्तमाचार्य जी महाराज

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Faridabad/Alive News : सूरजकुंड मार्ग स्थित श्रीलक्ष्मीनारायण दिव्यधाम-श्रीसिद्धदाता आश्रम में बुधवार को एक भव्य आनंदोत्सव का आयोजन किया गया। यह उत्सव आश्रम के संस्थापक वैकुंठवासी श्रीमद जगदगुरु श्री रामानुजाचार्य स्वामी सुदर्शनाचार्य जी महाराज की पावन जयंती और श्रीसिद्धदाता आश्रम के स्थापना दिवस के उपलक्ष्य में हर्षोल्लास के साथ मनाया गया।

उत्सव की शुरुआत करते हुए श्रीरामानुज संप्रदाय की तीर्थपीठ इंद्रप्रस्थ एवं हरियाणा पीठाधीश्वर अनंतश्री विभूषित श्रीमद जगदगुरु श्रीरामानुजाचार्य स्वामी श्रीपुरुषोत्तमाचार्य जी महाराज ने वैकुंठवासी स्वामी श्रीसुदर्शनाचार्य जी महाराज की समाधि पर विधि-विधान से पूजन किया। इस दौरान समाधि पर फूलों की चादर चढ़ाई गई और जनकल्याण की कामना के साथ महायज्ञ का आयोजन हुआ। इसके साथ ही स्वामी श्रीपुरुषोत्तमाचार्य जी महाराज ने मंदिर में गुरु महाराज के दिव्य विग्रह का पंचामृत अभिषेक कर उन्हें 56 भोग अर्पित किए।

“शरणागति और समर्पण ही मोक्ष की राह” स्वामी पुरुषोत्तमाचार्य
इस पावन अवसर पर श्रद्धालुओं को संबोधित करते हुए स्वामी पुरुषोत्तमाचार्य जी महाराज ने गुरु महिमा और ईश्वर के प्रति समर्पण के महत्व पर प्रकाश डाला। उन्होंने कहा, “गुरु महाराज ने हमेशा भक्तों के कल्याण के लिए शरणागति का मंत्र दिया है। ईश्वर के प्रति संपूर्ण समर्पण भाव ही मनुष्य को मोक्ष की राह दिखा सकता है। इसके लिए श्रद्धालुओं को सामाजिक सदव्यवहार अपनाते हुए जीवन जीना चाहिए।”

स्वामी जी ने आगे कहा कि जब शरीर में सद्गुणों के माध्यम से सकारात्मक ऊर्जा और स्फूर्ति आती है, तो समर्पण भाव और मजबूत होता है। उन्होंने गुरु को जीवन में सर्वोच्च बताते हुए कहा कि सद्गुरु के दिखाए मार्ग पर चलकर ही जीवन को सरल बनाया जा सकता है। गुरु की शरण में आने से श्रद्धालु के सभी दुर्गुण और पाप नष्ट हो जाते हैं। मनुष्य का असली बंधन उसके कर्म हैं और परहित (दूसरों की भलाई) का भाव ही व्यक्ति को महान बनाता है।

कलश यात्रा और भजनों पर झूमे श्रद्धालु
आनंदोत्सव का शुभारंभ महिलाओं द्वारा निकाली गई भव्य कलश यात्रा से हुआ। इसके बाद आयोजित सांस्कृतिक एवं धार्मिक कार्यक्रमों में प्रसिद्ध कलाकारों ने भजनों की ऐसी अमृत वर्षा की कि श्रद्धालु घंटों मंत्रमुग्ध होकर झूमते रहे। ‘देना हो तो दीजिए जन्म जन्म का साथ’ और ‘मेरा बाबा मेरे साथ है, तो डरने की क्या बात है’ जैसे सुमधुर संगीतमयी भक्ति गीतों ने पूरे परिसर को भक्तिमय कर दिया। इस उत्सव में भारी संख्या में पहुंचे श्रद्धालुओं ने गुरु महाराज का आशीर्वाद लिया और प्रसाद ग्रहण किया।