March 19, 2026

30 साल पुराने मुकदमे का नाटकीय अंत, बिना गवाह और सबूत के आरोपी ने कबूला जुर्म

Faridabad/Alive News: फरीदाबाद की जिला अदालत में करीब 30 साल से लंबित एक पुराने आपराधिक मामले का हैरान करने वाला अंत हुआ। इस केस में न तो कोई गवाह बचा, न ही सबूत मौजूद थे और न ही सुनवाई के दौरान लंबी तारीखों का सिलसिला चला। आखिरकार आरोपी ने खुद ही अपना जुर्म स्वीकार कर लिया, जिसके बाद अदालत ने उसे दोषी करार देते हुए न्यायिक हिरासत में बिताए 19 दिनों को ही पर्याप्त सजा मान लिया।

क्या है पूरा मामला?

यह मुकदमा 18 सितंबर 1996 को ओल्ड फरीदाबाद थाने में दर्ज किया गया था। गांव फरीदपुर निवासी सुभाष चंद ने शिकायत दी थी कि 17 सितंबर की रात उनके खेत में बने कोठरे से ट्यूबवेल की मोटर चोरी हो गई।

जांच के दौरान पुलिस ने हीरालाल नाम के व्यक्ति को गिरफ्तार किया। उसने बताया कि चोरी की मोटर उसने विजय उर्फ बिजेंद्र को बेच दी थी। इसके बाद 5 नवंबर 1996 को बिजेंद्र को गिरफ्तार कर उसके पास से मोटर बरामद की गई।

केस कैसे लटका रहा?

बिजेंद्र को अगले ही दिन जमानत मिल गई। पुलिस ने हीरालाल पर चोरी और बिजेंद्र पर चोरी का सामान रखने (IPC धारा 411) का मामला दर्ज कर चालान पेश कर दिया। लेकिन मुकदमे के दौरान ही हीरालाल की मौत हो गई, जबकि बिजेंद्र अदालत में पेश नहीं हुआ और 11 जनवरी 2005 को उसे भगोड़ा घोषित कर दिया गया।

मामला सामान्य धाराओं का होने के कारण पुलिस का ध्यान भी इस ओर नहीं गया। बिजेंद्र को लगा कि केस खत्म हो चुका है और वह इसे लगभग भूल गया।

2025 में फिर खुला मामला

दिसंबर 2025 में भगोड़ा आरोपियों के खिलाफ चलाए गए अभियान के दौरान पुलिस ने बिजेंद्र को गिरफ्तार कर लिया और अदालत में पेश किया। उसे जेल भेजा गया और 7 जनवरी 2026 को जमानत मिली। इसके साथ ही मामला फिर से शुरू हुआ।

न गवाह, न सबूत—फिर भी फैसला

सुनवाई के दौरान यह सामने आया कि न तो शिकायतकर्ता, न जांच अधिकारी और न ही मुख्य आरोपी जीवित थे। ऐसे में कोई गवाह या सबूत उपलब्ध नहीं था। इस स्थिति में बिजेंद्र ने अदालत में अपना अपराध स्वीकार कर लिया।

मुख्य न्यायिक दंडाधिकारी उपेंद्र सिंह ने उसे दोषी ठहराते हुए जेल में बिताए 19 दिन को ही सजा मान लिया।

मुकदमे की खास बात

इस मामले की सबसे खास बात यह रही कि इसमें न शिकायतकर्ता बचा, न जांच अधिकारी और न ही मुख्य आरोपी। सिर्फ केस और सह-आरोपी ही बचे थे।

अब इस फैसले के साथ जिला अदालत का सबसे पुराना लंबित आपराधिक मामला खत्म हो गया है। फिलहाल अदालत में सबसे पुराना लंबित केस जुलाई 2007 का है। बिजेंद्र (65) का परिवार इस मामले पर कुछ भी कहने से बच रहा है और इसे अपनी प्रतिष्ठा से जुड़ा विषय मानता है।