Faridabad/Alive News: सूरजकुंड में आयोजित 39वें अंतरराष्ट्रीय आत्मनिर्भर शिल्प मेले में देश और विदेश की संस्कृति और शिल्पकला एक साथ देखने को मिल रही है। मेले में थीम स्टेट मेघालय और उत्तर प्रदेश के साथ-साथ पार्टनर देश मिस्र की सांस्कृतिक झलक भी दिखाई दे रही है। मेला परिसर में बना इंटरनेशनल पवेलियन पर्यटकों के लिए खास आकर्षण बना हुआ है, जहां बड़ी संख्या में लोग पहुंचकर खरीदारी कर रहे हैं।
इंटरनेशनल पवेलियन में कई देशों के शिल्पकारों ने अपने-अपने स्टॉल लगाए हैं। यहां अलग-अलग देशों की संस्कृति और पारंपरिक हस्तकला देखने को मिल रही है। विदेशी कारीगरों की अनोखी कला पर्यटकों को खूब पसंद आ रही है।
इसी पवेलियन में ट्यूनीशिया के शिल्पकारों द्वारा जैतून की लकड़ी (ऑलिव वुड) से बने उत्पाद खास आकर्षण बने हुए हैं। ट्यूनीशिया के शिल्पकार फियोजी खाबी ने बताया कि वे पिछले 10 वर्षों से सूरजकुंड मेले में आ रहे हैं। इस बार वे ऑलिव वुड से बने रसोई के बर्तन और घर सजाने का सामान लेकर आए हैं।
उन्होंने बताया कि ऑलिव वुड से बने सामान तैयार करने में 2 से 4 दिन का समय लगता है। उनकी स्टॉल पर झूला, कॉफी और टी सेट, कुर्सियां, फ्लावर पॉट, घड़ियां, कॉर्नर स्टूल सहित कई तरह के उत्पाद उपलब्ध हैं, जिनकी कीमत 200 रुपये से लेकर 25 हजार रुपये तक है।
शिल्पकारों का कहना है कि जैतून की लकड़ी मजबूत, टिकाऊ और सुंदर बनावट वाली होती है। यह लकड़ी प्राकृतिक रूप से जीवाणुरोधी होती है, इसलिए रसोई के बर्तनों के लिए सुरक्षित मानी जाती है। इसकी खास डिजाइन और रंग इसे और भी आकर्षक बनाते हैं।
इंटरनेशनल पवेलियन में इन अनोखी शिल्प कृतियों को देखने और खरीदने के लिए पर्यटकों की भारी भीड़ उमड़ रही है। यह विदेशी शिल्पकला सूरजकुंड मेले की खास पहचान बनती जा रही है।

