March 7, 2026

सूरजकुंड मेले में राजस्थान के लक्ष्मी लाल कुमार की मिट्टी कला बनी आकर्षण का केंद्र

Faridabad/Alive News: 39 वें सूरजकुंड अंतर्राष्ट्रीय शिल्प मेले में देश-विदेश से आए कारीगर अपनी कला और पारंपरिक शिल्प का प्रदर्शन कर रहे हैं। मेले में मिट्टी से बने बर्तन और सजावटी सामान लोगों को खूब पसंद आ रहे हैं। खास तौर पर राजस्थान की मिट्टी कला मेले की शान बढ़ा रही है।

राजस्थान के राजसमंद जिले के गांव मौलाना से आए कारीगर लक्ष्मी लाल कुमार ने गेट नंबर-2 पर अपनी स्टॉल लगाई है। उनकी दुकान पर रंग-बिरंगे घड़े, सुराही, दिये, पानी की बोतल, फूलदान, सजावटी प्लेटें और काली व चिकनी मिट्टी से बने कई तरह के सामान उपलब्ध हैं। इन पर बने पारंपरिक राजस्थानी डिजाइन और चमकीले रंग पर्यटकों को अपनी ओर आकर्षित कर रहे हैं।

लक्ष्मी लाल कुमार अपने सहायक राजकुमार के साथ बताते हैं कि यह उनकी पुश्तैनी कला है और वे साल 2009 से सूरजकुंड मेले में भाग ले रहे हैं। उनकी कला के लिए उन्हें वर्ष 2017 में कलामणि अवॉर्ड से सम्मानित भी किया जा चुका है। उन्होंने बताया कि उनकी स्टॉल पर मिट्टी से बने 200 से ज्यादा प्रकार के सामान मौजूद हैं। यहां मिलने वाला “मैजिक दीपक” भी लोगों के लिए खास आकर्षण बना हुआ है।

कारीगरों का कहना है कि पारंपरिक तकनीकों से बने मिट्टी के बर्तन मजबूत, उपयोगी और पर्यावरण के अनुकूल होते हैं। मेले में कई कारीगर मौके पर ही चाक पर मिट्टी को आकार देते नजर आते हैं, जिससे लोग उनकी कला को करीब से देख पा रहे हैं।

सूरजकुंड मेला सिर्फ खरीदारी का ही नहीं, बल्कि भारतीय हस्तकला और ग्रामीण संस्कृति को जानने का भी बड़ा मंच है। यहां लोग कारीगरों की मेहनत और रचनात्मकता की सराहना कर रहे हैं। राजस्थान की मिट्टी कला इस मेले में भारतीय सांस्कृतिक विरासत को जीवित रखने में अहम भूमिका निभा रही है।