Faridabad/Alive News: अमावस्या के दिन क्या न करें, अगर करेंगे तो लगेगा यह दोष पंचांग के अनुसार आज शुक्रवार को पौष मास के कृष्णपक्ष की पंद्रहवीं तिथि यानी अमावस्या है। हिंदू धर्म में इस तिथि के स्वामी पितृ देवता माने गये हैं। मान्यता है कि इस दिन स्नान, दान और तर्पण करने से पितरों की आत्मा को शांति मिलती है और परिवार पर उनका आशीर्वाद बना रहता है।
हिंदू धर्म में प्रत्येक दिन और प्रत्येक तिथि किसी न किसी देवी-देवता की पूजा के लिए समर्पित रहती है। यदि बात करें अमावस्या तिथि की तो इसे पितरों के लिए समर्पित माना गया है। मत्स्य पुराण के अनुसार इस तिथि का नाम पितृगणों में ‘अमावसु’ के पितृ नाम पर पड़ा है। यह तिथि श्राद्ध-तर्पण के लिए उत्तम मानी गई है. आज अग्रेंजी साल की आखिरी अमावस्या यानी पौष अमावस्या का पावन पर्व है। इस तिथि को स्नान-दान से लेकर मंत्र साधना आदि के लिए अत्यंत ही फलदायी माना गया है।
क्या कार्य करें पौष अमावस्या पर
– हिंदू मान्यता के अनुसार किसी भी मास की अमावस्या तिथि पर स्नान और दान का बहुत ज्यादा महत्व माना गया है। ऐसे में आज साल की आखिरी अमावस्या पर यदि संभव हो तो किसी जल तीर्थ पर स्नान करें। यदि जल तीर्थ पर न जा सके तो अपने घर में ही नहाने के पानी में गंगाजल मिलाकर स्नान करें।
– हिंदू मान्यता के अनुसार पौष मास की अमावस्या पर स्नान के साथ दान करने का भी महत्व है। मान्यता है कि अमावस्या पर काले तिल का दान करने पर पितरों का विशेष आशीर्वाद प्राप्त होता है। ऐसे में आज पितृ दोष को दूर करने और पितरों का आशीर्वाद पाने के लिए किसी जरूरतमंद व्यक्ति को काले तिल का दान अवश्य करें।
– अमावस्या तिथि को मंत्र साधना के लिए भी फलदायी माना जाता है। आज आप शिव, शनि और शक्ति की मंत्र साधना करते हुए उनका आशीर्वाद प्राप्त कर सकते हैं।
– अमावस्या के दिन तमाम तरह के दान की तरह दीपदान का बहुत ज्यादा महत्व है। ऐसे में आज शाम के समय पीपल के नीचे और अपने घर की दक्षिण दिशा में यम देवता के लिए विशेष रूप से सरसों के तेल का दीपक जलाएं।
क्या न करें अमावस्या पर
– अमावस्या के दिन व्यक्ति को देर तक नहीं सोना चाहिए।
– अमावस्या के दिन पुराने और गंदे कपड़े नहीं पहनना चाहिए।
– अमावस्या के दिन किसी के साथ वाद-विवाद करने से बचें।
– अमावस्या तिथि पर किसी निर्धन, कमजोर और जरूरतमंद व्यक्ति का भूलकर भी अपमान न करें।
– अमावस्या तिथि पर दिन में भूलकर भी न सोएं।
क्या है साल की आख़िरी अमावस्या का महत्व
-पूरे वर्ष की नकारात्मकता, दोष और पाप कर्मों से मुक्ति का अवसर माना जाता है
-पितृ दोष शांति के लिए यह अमावस्या विशेष फलदायी मानी जाती है
-नए वर्ष से पहले आत्मिक और मानसिक शुद्धि का समय होता है
-दान, जप, तप और सेवा से आने वाले वर्ष में शुभता आती है
क्या है इस अमावस्या का आध्यात्मिक दृष्टि से लाभ
– मन को शांति
– पितरों का आशीर्वाद
-जीवन में बाधाओं में कमी
-नए वर्ष में सकारात्मक ऊर्जा
क्या है पौष अमावस्या की पूजा विधि
सूर्योदय से पूर्व पानी में गंगाजल मिलाकर स्नान करें। तांबे के लोटे से सूर्य देव को अर्घ्य दें। दक्षिण दिशा की ओर मुख कर पितरों का तर्पण करें। पीपल के वृक्ष में जल अर्पित कर सरसों के तेल का दीपक जलाएं।
सात परिक्रमा करें और दान-पुण्य करें। “ॐ पितृभ्यो नमः” या “ॐ नमो भगवते वासुदेवाय” का 108 बार जप करें।
क्या करें दान
काले तिल का दान
पितरों की आराधना में काले तिल का विशेष स्थान है। मान्यता है कि काले तिल से किया गया तर्पण सीधे पितृलोक तक पहुंचता है जिससे पितृ संतुष्ट होते हैं और अकाल मृत्यु से जुड़े दोष शांत होते हैं।
अन्न व गुड़ का दान
शास्त्रों में अन्न दान को महादान कहा गया है। पौष अमावस्या पर चावल, गेहूं, जौ व अन्य अनाज का दान करने से पितरों को तृप्ति मिलती है और आर्थिक परेशानियां व कर्ज से मुक्ति का योग बनता है। इस दिन गुड़ का दान करने से कुंडली में सूर्य और गुरु की स्थिति मजबूत होती है। इससे भाग्य का उदय होता है और करियर व कार्यक्षेत्र की बाधाएं दूर होती हैं।
कंबल व गर्म कपड़ों का दान
पौष माह की कड़ाके की ठंड को देखते हुए जरूरतमंदों को कंबल व गर्म कपड़ों का दान विशेष पुण्यदायी माना गया है। इससे जीवन में सुख-शांति और सकारात्मकता बढ़ती है।

