March 8, 2026

पौष अमावस्या पर दान-पुण्य का विशेष महत्व, पितृ दोष निवारण के लिए शुभ मानी गई तिथि

Faridabad/Alive News: आज शुक्रवार को पौष मास के कृष्ण पक्ष की पंद्रहवीं तिथि यानी अमावस्या को सुहागिन महिलाओं को अपना सिर नहीं धोना चाहिए क्योंकि इससे वंश में रुकावट आने लगती है वहीं विधवा अपना सिर धो सकती है क्योंकि उनके बालों से गिरने वाला पानी पितृ को समर्पित होता है। उत्तर प्रदेश में मूंगफली, चना, दाल और वस्त्र का दान किया जाता है। वहीं कुछ जगह सफेद चीजों का दान किया जाता है।

श्री बांके बिहारी मंदिर के पंडित विनोद शास्त्री ने जानकारी देते हुए बताया कि इस अमावस्या के दिन अपने पितरों को ध्यान में रखते हुए दान करना चाहिए क्योंकि शिव मुक्ति के दाता है और जो व्यक्ति अपने पितृ के लिए आज के दिन दान करता है उसे पुन: की प्राप्ति होती है। उस व्यक्ति के घर में कभी भी दोष नहीं रहता। उसके घर में गृह क्लेश नहीं होता और सुख शांति और समृद्धि की प्राप्ति होती है।

उन्होंने कहा कि इस अमावस्या में सुहागन महिलाओं को सिर नहीं धोना चाहिए क्योंकि आज के दिन सिर धोने से वंश में रुकावट आने लगती है। विधवा महिलाओं के पति नहीं होते है तो वह सिर धो सकती है क्योंकि उनके बाल से जो पानी गिरता है वह उनके पूर्वजों को मिलता है इसलिए विधवाओं को इस दिन सिर धोने को अनुमति होती है।

उन्होंने कहा कि आज के दिन मंदिर में लोग सत्यनारायण भगवान की कथा करवाते है। कई अपने पूर्वजों की आत्मा की शांति के लिए भंडारा करवाते है।

उत्तर प्रदेश पिलखुना के पंडित कल्लू बाजपेयी ने बताया कि पितृ दोष खत्म करने के लिए उनकी संताने आस- पास मौजूद नदियों या हो सके तो गंगा जी जाकर स्नान करती है और गुड़, मूंगफली या अन्य चीजों का जरूरतमंदों को दान करती है जिससे पितृ दोष खत्म होता है और धन -दौलत की प्राप्ति होती हैं।

उन्होंने कहा कि इस दिन लोगों को सुबह स्नान करके गरीब कन्या और बच्चों को मूंगफली गुड़, चना , दाल और रेवाड़ी और अपनी जरूरतों के अनुसार वस्त्र का दान करना चाहिए।

उन्होंने यह भी बताया कि इस दिन पितृ को एक स्थान देकर उन्हें पूड़ी ,सब्जी और उनकी पसंदीदा चीजों का भोग लगाना चाहिए।

वैष्णो देवी मंदिर के पंडित कृष्ण पंडित ने बताया कि पौष अमावस्या के दिन पवित्र नदियों में स्नान करने से पापों का नाश होता है। कड़ाके की ठंड के कारण इस दिन गर्म वस्त्र, अन्न और तिल का दान महादान माना गया है। जिन लोगों की कुंडली में पितृ दोष होता है, उनके लिए यह तिथि विशेष फलदायी मानी जाती है। अमावस्या पर सूर्य और चंद्रमा एक ही राशि में स्थित होते हैं, जिससे मानसिक शांति और आत्म-शुद्धि का योग बनता है।