March 7, 2026

अल-फलाह यूनिवर्सिटी पर जमीन कब्जे और नियमों के उल्लंघन के आरोप

Faridabad/Alive News: अल-फलाह यूनिवर्सिटी, जहां हाल ही में आतंकी साजिश का खुलासा हुआ था, अब जमीन अधिग्रहण और निर्माण नियमों के उल्लंघन को लेकर विवादों में घिर गई है। यूनिवर्सिटी के चांसलर जवाद अहमद सिद्दीकी पर आरोप है कि उन्होंने जमीन खरीदने और इमारतें बनाने में कई नियमों को नजरअंदाज किया। ग्रामीणों ने भी शिकायत की है कि यूनिवर्सिटी ने गांव के पारंपरिक रास्तों पर कब्जा कर लिया, जिससे किसानों को अपने खेतों तक पहुंचने में दिक्कत हो रही है।

राजस्व विभाग और नगर योजनाकार एन्फोर्समेंट विंग ने जांच शुरू कर दी है। नायब तहसीलदार करण सिंह टीम के साथ यूनिवर्सिटी पहुंचे और जमीन व निर्माण से जुड़ी जानकारी जुटाई। अब इन दस्तावेजों का मिलान सरकारी रिकॉर्ड से किया जाएगा और अन्य विभागों से भी रिपोर्ट मांगी गई है।

ग्रामीणों का आरोप: रास्तों पर कब्जा कर जमीन खरीदने का दबाव
ग्रामीणों के अनुसार 1990 से यहां जमीन खरीदने की प्रक्रिया शुरू हुई। पहले 30 एकड़ में इंजीनियरिंग कॉलेज बना और बाद में आसपास के खेतों की खरीद का सिलसिला बढ़ा। ग्रामीणों का कहना है कि सिद्दीकी ने किसानों पर दबाव बनाने के लिए गांव के कई रास्तों पर कब्जा कर लिया, जिससे कीमत घटाकर वह जमीन खरीद सके।

किसानों की शिकायतों के बावजूद, राजनीतिक दबाव के चलते कोई बड़ा कदम नहीं उठाया गया।

सिद्दीकी ने बाद में धौज की 76 एकड़ जमीन भी खरीद ली। इस दौरान कई विवाद सामने आए, लेकिन मामला आगे नहीं बढ़ पाया।

यूनिवर्सिटी की जमीन पर बने ढांचे
76 एकड़ जमीन के नक्शे के अनुसार—
• इंजीनियरिंग बिल्डिंग, वर्कशॉप, मोर्चरी
• अस्पताल, गर्ल्स और बॉयज हॉस्टल
• डॉक्टरों की रिहायश के लिए बहुमंजिला इमारत
• एनाटॉमी और मेडिकल बिल्डिंग
• दो मुख्य प्रवेश द्वार, बड़ा पार्क और प्रशासनिक भवन

यूनिवर्सिटी से जुड़े प्रमुख तथ्य
• 1995: अल-फलाह ट्रस्ट की स्थापना
• 1997: इंजीनियरिंग कॉलेज शुरू
• 2013: कॉलेज को NAAC से ‘A’ ग्रेड
• 2014: हरियाणा सरकार ने विश्वविद्यालय की मान्यता दी
• 2019: मेडिकल कॉलेज शुरू
• 1500 विद्यार्थी, जिनमें 150 कश्मीरी
• 200 से अधिक फैकल्टी
• 40% सीटें अल्पसंख्यक कोटा

गांव की पंचायत का आरोप: पंचायत की सड़क का भी कब्जा
धौज पंचायत ने भी यूनिवर्सिटी मालिक पर पंचायत की जमीन कब्जाने का आरोप लगाया। आरोप है कि टीकरी खेड़ा और धौज गांव के बीच 22 मीटर चौड़ी सड़क के करीब एक किलोमीटर हिस्से पर यूनिवर्सिटी ने निर्माण कर दिया और उसे परिसर में मिला लिया। यह मामला अदालत तक पहुंच चुका है।

नायब तहसीलदार करण सिंह ने कहा—
“यूनिवर्सिटी की पूरी जमीन का रिकॉर्ड जांचा जा रहा है। किस नंबर पर क्या निर्माण हुआ, क्या इसकी अनुमति ली गई थी—इसकी रिपोर्ट नगर योजनाकार विभाग देगा। उसके बाद आगे की कार्रवाई की जाएगी।”