
आत्महत्या ऐसी समस्या है जो न केवल मनुष्य का जीवन अंत करती है ,बल्कि अंत होता है उन मां बाप की परवरिश का, अंत होता है एक हंसते खेलते परिवार का , यहां तक कि अंत होता है समाज का जहां एक व्यक्ति इतने साल जीने के बाद भी एक ऐसा रिश्ता नहीं बना पाया जिससे वह अपना दुख साझा कर सके।
क्या लगता है केवल आत्महत्या की समस्याओं का समाधान है? यह तो पता नहीं कि क्या सच में आत्महत्या करने से समस्याओं का अंत होगा या नहीं ? परंतु इतना ज़रूर निश्चित है कि इसके बाद दुखों का आरंभ अवश्य होगा, उन लोगों के लिए जो तुम्हारे बाद संसार में रह जाएंगे मानव जीवन अमूल्य हैं और इसे इस प्रकार व्यर्थ न करें। इस बात में कोई संदेह नहीं कि समस्या प्रत्येक व्यक्ति के जीवन में है। परंतु यु हार मानकर जीवन का अंत करना भी तो कोई समझदारी का काम नहीं।
इन दिनों हर व्यक्ति समस्याओं से घिरा हुआ है ,परंतु सकारात्मकता ,संवाद ,स्नेह और सहयोग से इसका सामना किया जा सकता है। आत्महत्या कभी किसी समस्या का समाधान नहीं हो सकती। परंतु यह क़दम एक व्यक्ति की दुर्बलता और विवेकहीनता का प्रतीक है।
समाज के जागरूक नागरिक होने के कारण हम सभी का यह कर्तव्य बनता है कि हम एक दूसरे के प्रति सहानुभूति और सहयोग की भावना रख प्रत्येक व्यक्ति की सहायता करें।

