Delhi/Alive News: हिंदू धर्म में एकादशी व्रत को सभी व्रतों में सर्वोत्तम माना गया है। यह व्रत भगवान विष्णु को समर्पित होता है, जो सृष्टि के पालनकर्ता और धर्म के रक्षक हैं। कार्तिक शुक्ल पक्ष की एकादशी को देवउठनी या देवप्रबोधिनी एकादशी कहा जाता है। ऐसा माना जाता है कि इस दिन भगवान विष्णु चार महीने की योगनिद्रा से जागते हैं और उनके जागने से सम्पूर्ण सृष्टि में पुनः शुभता, सौभाग्य और मंगल का संचार होता है। यह दिन विशेष रूप से मांगलिक कार्यों की शुरुआत के लिए शुभ माना जाता है। इसी दिन से विवाह, गृहप्रवेश, यज्ञ, व्रत, उपनयन संस्कार आदि पुनः प्रारंभ किए जाते हैं। भक्तजन इस दिन व्रत रखकर भगवान विष्णु और माता लक्ष्मी की आराधना करते हैं, जिससे उन्हें पुण्य, समृद्धि और मोक्ष की प्राप्ति होती है। देवउठनी एकादशी का व्रत आत्मशुद्धि, सत्कर्म और श्रद्धा का प्रतीक है।
तुलसी का दिव्य स्वरूप
तुलसी को लक्ष्मी का स्वरूप माना गया है और वे भगवान विष्णु को अत्यंत प्रिय हैं। ऐसा कहा जाता है कि विष्णुजी निद्रा से जागने के बाद सबसे पहले तुलसी की वंदना सुनते हैं। घर में तुलसी होने से वातावरण पवित्र रहता है, नकारात्मक ऊर्जा दूर होती है और स्वास्थ्य लाभ भी प्राप्त होता है।
तुलसी-शालिग्राम का पवित्र मिलन
कार्तिक मास की देवउठनी एकादशी को तुलसी और शालिग्राम का विवाह बड़े हर्षोल्लास से किया जाता है। सुंदर मंडप में तुलसी और शालिग्राम के फेरे कराए जाते हैं। विवाह के समय भजन, कीर्तन और विष्णुसहस्त्रनाम का पाठ किया जाता है। यह विवाह भक्ति, प्रेम और समर्पण का प्रतीक है।

