Faridabad/Alive News: एनटीपीसी डी.ए.वी. पब्लिक स्कूल में आर्य समाज के संस्थापक महर्षि दयानंद सरस्वती जी के निर्वाण दिवस पर भव्य कार्यक्रम का आयोजन किया गया। इस अवसर पर स्कूल के धर्म शिक्षक जितेन्द्र दत्त ने महर्षि दयानंद सरस्वती के जीवन, उनके आदर्शों और समाज सुधार, नारी सम्मान व शिक्षा के क्षेत्र में उनके योगदान पर प्रकाश डाला।
इस पावन दिन पर विद्यार्थियों के सहयोग से 41 कुंडीय हवन यज्ञ का आयोजन किया गया, जिसमें छात्रों और शिक्षकों ने बड़ी संख्या में भाग लिया। हवन के माध्यम से सभी ने आध्यात्मिक शुद्धि, पर्यावरण संरक्षण और एकता का संदेश प्राप्त किया।
हवन के बाद विद्यालय में दीपावली उत्सव बड़े उत्साह और भक्ति भाव के साथ मनाया गया। नन्हे विद्यार्थियों ने दीप जलाकर अंधकार से प्रकाश की ओर बढ़ने का संदेश दिया। राम दरबार की सुंदर झांकी ने सभी दर्शकों को भावविभोर कर दिया और विद्यालय का वातावरण भक्ति, संस्कृति और आनंद से भर उठा।
कार्यक्रम की शुरुआत दोहा, श्लोक और चौपाई गायन प्रतियोगिता से हुई, जिसमें विद्यार्थियों ने अपनी भाषा की सुंदरता और भक्ति भावना का अद्भुत प्रदर्शन किया। इसके बाद भजन, नृत्य, गीत और रामायण पर आधारित प्रस्तुतियों ने सभी को मंत्रमुग्ध कर दिया।
हर वर्ष की तरह इस बार भी विद्यालय ने “एक मुट्ठी अनाज” मुहिम के तहत विद्यार्थियों द्वारा एकत्रित अनाज को प्रणव कन्या आश्रम, दक्ष्य वृद्ध एवं अनाथ आश्रम, तथा सड़क पर रहने वाले जरूरतमंद लोगों तक पहुँचाया। इसके साथ ही नन्हे विद्यार्थियों ने नवजीवन अस्पताल के डॉक्टरों को हस्तनिर्मित दीपक और रंगोलियाँ भेंट कर उनका आभार जताया।
इस अवसर पर रंगोली प्रतियोगिता और कला प्रदर्शनी भी आयोजित की गई, जिसमें विद्यार्थियों ने अपनी रचनात्मकता और कलात्मक प्रतिभा का शानदार प्रदर्शन किया।
विद्यालय की प्रधानाचार्या अलका अरोड़ा ने विद्यार्थियों को संबोधित करते हुए कहा कि दीपावली का पर्व हमें अंधकार से प्रकाश और असत्य से सत्य की ओर बढ़ने की प्रेरणा देता है। उन्होंने छात्रों से प्रदूषण-मुक्त और स्वच्छ दीपावली मनाने का आग्रह किया तथा सत्य, सेवा और सदाचार के मार्ग पर चलने का संदेश दिया।
कार्यक्रम के अंत में राम जी की झांकी निकाली गई, जिसमें विद्यार्थी पारंपरिक वेशभूषा में “जय श्रीराम” के जयकारों के साथ उत्साहपूर्वक शामिल हुए। पूरा विद्यालय भक्ति, प्रकाश और आनंद से गूंज उठा।
शिक्षकगण और स्टाफ की उपस्थिति ने कार्यक्रम की शोभा और भी बढ़ा दी। यह दिवस वास्तव में डी.ए.वी. परिवार के लिए भक्ति, सेवा और संस्कृति का सुंदर संगम बन गया था।

