Faridabad/Alive New: नवरात्रि के इन नौ दिनों नौ माता की पूजा अर्चना की जाती है। 25 सितंबर को नवरात्रि का चौथा दिन है। इस दिन मां दुर्गा के चौथे नवदुर्गा स्वरूप मां कूष्मांडा की पूजा अर्चना की जाती है। मान्यता है कि मां कूष्मांडा की पूजा करने से रोग, शोक व कष्ट दूर होते हैं और धन यश व आय में वृद्धि होती है।
मां दुर्गा के चौथे स्वरूप के उपासना करने से घर में सुख,समृद्धि व उन्नति होती है।
हिंदू धर्म शास्त्रों के अनुसार मां कूष्मांडा सूर्य मंडल के भीतर के लोक में वास करती हैं और मां के शरीर की कांति भी सूर्य के समान तेज होते हैं। मां के तेज व प्रकाश से सभी दिशाएं प्रकाशित हो रही हैं।
कैसा है मां कूष्मांडा का स्वरूप
मां कूष्मांडा की आठ भुजाएं होती है इसलिए मां को अष्टभुजा देवी भी कहा जाता है। मां के सातों हाथ में क्रमशः कमंडल, धनुष बाण, कमल, अमृत पूर्ण कलश, चक्र, गदा व जपमाला होती है।साथ ही मां कूष्मांडा की सवारी शेर होती है।
मां कूष्मांडा का प्रिय रंग
नवरात्रि के चौथे दिन का शुभ रंग हरा माना गया है मानता है की मां कूष्मांडा को हरा रंग अति प्रिय है।
क्या है मां कूष्मांडा की पूजा विधि
सूर्य उदय से पूर्व उठकर स्नान आदि करके स्वच्छ वस्त्र धारण करें। इसके बाद मां कूष्मांडा का जाप करते हुए मां दुर्गा को धूप ,अक्षत, लाल पुष्प, फल श्रृंगार का सामान व मिठाई अर्पित करें। माता रानी को भोग लगाए। अंत में मां की आरती करके मंत्र का जाप करें।
क्या है मां कूष्मांडा का प्रिय भोग
मान्यता है कि मां कूष्मांडा का प्रिया भोग मालपुआ है इसके अलावा मां को दही वह हलवे का भी भक्त भोग लगा सकते हैं। ऐसा माना जाता है की मां को उनका प्रिय भोग लगाने से भक्तों की मनवांछित इच्छा पूर्ण होती है।
क्या है मां कूष्मांडा के मुख्य मंत्र
मां कूष्मांडा का मंत्र: ॐ देवी कूष्मांडायै नमः।।
मां कुष्मांडा का बीज मंत्र: ए हिम क्लीं कूष्मांडायै नमः
मां कुष्मांडा का स्तुति मंत्र: या देवी सर्वभूतेषु मां कूष्माण्डा रूपेण संस्थिता। नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नम:

