Faridabad/Alive News: आरटीआई एक्टिविस्ट एवं फार्मासिस्ट दीपक त्रिपाठी ने प्रदेश के अधिकतर मेडिकल स्टोर पर फार्मासिस्ट की अनुपस्थिति में गैर फार्मासिस्ट द्वारा दवा वितरण करने पर आपत्ति उठाते हुए उच्च अधिकारियों को ईमेल लिखकर जांच करने और दोषी पाये जाने पर कड़ी कार्रवाई की मांग की है।
आरटीआई एक्टिविस्ट एवं फार्मासिस्ट दीपक त्रिपाठी ने अपनी शिकायत में यह भी आरोप लगाया कि प्रदेश के कई मेडिकल स्टोर्स पर सीसीटीवी लगे होने के बावजूद भी पंजीकृत फार्मासिस्ट लगातार अनुपस्थित रहते हैं और आमजन को गैर फार्मासिस्ट व्यक्ति ही दवाइयां वितरित करते देखे जा रहे है।
शिकायतकर्ता त्रिपाठी ने इसे जनता के स्वास्थ्य के साथ खिलवाड़ बताया और संबंधित विभागों के अधिकारियों से त्वरित कार्रवाई की मांग की है।
शिकायत में बताया गया है कि दुकानों पर अक्सर ऐसा देखा गया है कि रजिस्टर्ड फार्मासिस्ट की जगह गैर-फार्मासिस्ट लोग मरीजों को दवा देकर परामर्श दे रहे होते हैं, जोकि गैर कानूनी है। उनका यह भी आरोप है कि दवा स्टोर पर सीसीटीवी कैमरे होने के बावजूद अधिकारी निरीक्षण के दौरान कार्रवाई में लापरवाही बरत रहे हैं। ऐसे स्टोर संचालकों पर स्थानीय निरीक्षक कोई पर्याप्त कदम नहीं उठा पा रहे हैं।
उन्होंने कहा कि प्रदेश में लंबे समय से “फार्मासिस्ट प्रमाणपत्र व लाइसेंस” किराये पर लेने के गैर कानूनी कार्य चल रहे हैं और इस कार्य से फार्मेसी सेवाओं की पारदर्शिता और विश्वसनीयता प्रभावित हो रही हैं।
शिकायतकर्ता दीपक त्रिपाठी ने स्वास्थ्य विभाग को लिखी ईमेल में मुख्य मांगें करते हुए बताया कि प्रदेश के सभी मेडिकल स्टोर्स पर जिला व राज्य स्तरीय औचक निरीक्षण कराए जाएं, सीसीटीवी रिकॉर्डिंग की मदद से फार्मासिस्ट की अनुपस्थिति और गैर-योग्य लोगों द्वारा दवा वितरण की विशेष जांच की जाए, दोषी पाए जाने पर लाइसेंस निलंबन, जुर्माना, एफआईआर समेत कानूनी तथा अनुशासनात्मक कार्रवाई की जाए, जन स्वास्थ्य की रक्षा के लिए स्पष्ट दिशा-निर्देश और नियम जारी किए जाये, फार्मासिस्टों के पहचान चिन्ह व ड्रेस कोड (सफेद एप्रन, नाम पट्टिका, रजिस्ट्रेशन नंबर, आईडी कार्ड) अनिवार्य किए जाएं ताकि उपभोक्ता को फार्मासिस्ट की पहचान हो सके। शिकायतकर्ता ने अनुरोध किया है कि ऐसे स्टोर पर कार्यवाही करने की सत्यापित कॉपी उन्हें भी प्रदान की जाए तथा उन्हें भी जांच में शामिल किया जाए।
शिकायतकर्ता ने यह भी बताया है कि शिकायत केवल जनहित, उपभोक्ता हित और राष्ट्रहित में की है। उन्होंने कहा कि अगर ऐसे गैर कानूनी और भ्रष्टाचार को नहीं रोका गया तो यह सीधे तौर पर लोगों के स्वास्थ्य और देश के विकास के लिए खतरा बन सकता है।

