March 7, 2026

चीन ने ब्रह्मपुत्र नदी पर शुरू किया बांध बनाना

Delhi/Alive News: चीन ने तिब्बत में ब्रह्मपुत्र नदी (चीन में यारलुंग सांगपो) पर दुनिया का सबसे बड़ा डैम बनाना शुरू कर दिया है। शनिवार को चीन के प्रधानमंत्री ली क्यांग ने इसकी शुरुआत की।

इसकी कुल लागत करीब 167.8 अरब डॉलर (लगभग 12 लाख करोड़ रुपए) बताई गई है। यह डैम अरुणाचल प्रदेश की सीमा से सटे न्यिंगची शहर में बनाया जा रहा है। इसे लेकर भारत और बांग्लादेश दोनों ने गहरी चिंता जताई गई है।

चीन की सरकारी समाचार एजेंसी शिन्हुआ के मुताबिक परियोजना में पांच सीढ़ीदार (कैस्केड) जलविद्युत स्टेशन होंगे। इससे हर साल 300 अरब किलोवॉट-घंटे से अधिक बिजली पैदा होगी। इस बिजली से 30 करोड़ लोगों की जरूरतों को पूरा किया जा सकता है।

भारत बांध का विरोध क्यों कर रहा?

ब्रह्मपुत्र नदी पर बनने वाला बांध तिब्बत पठार के पूर्वी छोर पर हिमालय की विशाल घाटी में बनाया जाएगा। इस इलाके में अक्सर भूकंप आते हैं। बांध के बनने से ईकोसिस्टम पर दबाव पड़ सकता है जिससे कई हादसे हो सकते हैं।

भारत के उत्तर-पूर्वी राज्य और बांग्लादेश पहले से ही भयंकर बाढ़ की घटनाओं का सामना कर रहे हैं और जलवायु परिवर्तन के कारण उन्हें और अधिक चुनौतियों जैसे- भूस्खलन, भूकंप और बाढ़ आदि का सामना करना पड़ सकता है। यही वजह है कि इस बांध के बनने से भारत की चिंता बढ़ गई है।

भारतीय विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता ने 3 जनवरी को एक प्रेस ब्रीफिंग में इस बांध को लेकर आपत्ति जताई थी। भारत ने कहा था कि ब्रह्मपुत्र पर बांध बनाने से निचले राज्यों के हितों को नुकसान नहीं पहुंचना चाहिए।

भारत भी ब्रह्मपुत्र पर बना रहा डैम

भारत भी अरुणाचल प्रदेश में इसी नदी पर एक बड़ा डैम बना रहा है। ब्रह्मपुत्र और सतलुज पर जल-प्रवाह डेटा को लेकर भारत-चीन के बीच 2006 से एक्सपर्ट लेवल मैकेनिज्म चल रहा है।

पिछले साल दिसंबर में एनएसए अजीत डोभाल और चीनी विदेश मंत्री वांग यी के बीच हुई बातचीत में भी यह मुद्दा उठा था।

2015 में चीन ने तिब्बत में 1.5 अरब डॉलर की लागत वाला जम हाइड्रोपावर स्टेशन शुरू किया था। तब भी भारत ने चिंता जताई थी कि चीन धीरे-धीरे ब्रह्मपुत्र के जलस्तर और दिशा पर कब्जा कर सकता है।