November 2, 2026

बीके अस्पताल में 50 लाख के डीजल घोटाले का मामला: खड़ी एंबुलेंसों के नाम पर हुई ईंधन खरीद की जांच शुरू, फ्लीट मैनेजर को नोटिस

Faridabad/Alive News: बीके सिविल अस्पताल में एक चौंकाने वाला मामला सामने आया है, जहां महीनों से अस्पताल परिसर और वर्कशॉप में खड़ी चार एंबुलेंसों के नाम पर करीब 50 लाख रुपये का डीजल खरीदे जाने का खुलासा हुआ है। इस बड़े वित्तीय फर्जीवाड़े के सामने आने के बाद स्वास्थ्य विभाग में हड़कंप मच गया है। मामले की गंभीरता को देखते हुए सिविल सर्जन डॉ. जयंत आहूजा ने 20 अक्टूबर को एक जांच कमेटी का गठन कर दिया है, जिसे 15 दिनों के भीतर रिपोर्ट सौंपने के निर्देश दिए गए हैं।​

बिना चले खर्च हो रहा था ईंधन

पंचकूला स्थित मुख्यालय द्वारा फ्यूल कार्ड के जरिए होने वाले लेनदेन की जांच के दौरान इस फर्जीवाड़े का पर्दाफाश हुआ। दस्तावेजों के मुताबिक, एंबुलेंस नंबर HR38GV3491 और HR38GY9863 पिछले तीन-चार महीनों से अस्पताल की मोर्चरी के पास खड़ी थीं, इसके बावजूद 11 अक्टूबर तक इनके फ्यूल कार्ड से डीजल भरवाने की एंट्रियां दर्ज की जाती रहीं। यही नहीं, एजेंसी की वर्कशॉप में जनवरी और अगस्त से खड़ी दो अन्य एंबुलेंसों (HR38Z0951 और HR38GV1670) के फ्यूल कार्ड से भी सितंबर और अक्टूबर तक लगातार डीजल निकाले जाने का रिकॉर्ड मिला है।​

राजनीतिक हलचल और अधिकारियों की कार्रवाई

इस मामले के उजागर होने के बाद हरियाणा के पूर्व उपमुख्यमंत्री दुष्यंत चौटाला ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म के जरिए नायब सरकार को आड़े हाथों लेते हुए तीखे सवाल उठाए। उन्होंने आरोप लगाया कि प्रदेश में खड़े वाहनों के नाम पर लाखों का डीजल खर्च हो रहा है और इस मामले में छोटे कर्मचारियों को बलि का बकरा बनाकर बड़े अधिकारियों को बचाने की कोशिश की जा रही है।

​दूसरी ओर, एनएचएम के निदेशक वीरेंद्र यादव ने भी बीके अस्पताल के दौरे के दौरान इस मामले पर अपनी नजर बनाए रखने की बात कही। डिप्टी सिविल सर्जन (एनएचएम) विनय गुप्ता ने 16 अक्टूबर को ही आरटीएस फ्लीट मैनेजर को कारण बताओ नोटिस जारी कर डीजल खरीद का पूरा ब्योरा, पेट्रोल पंप की जानकारी और जिम्मेदार कर्मचारियों के नाम मांगे हैं।​

स्वास्थ्य विभाग की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल

इस पूरे प्रकरण ने स्वास्थ्य विभाग की कार्यप्रणाली और मॉनिटरिंग सिस्टम पर गंभीर सवालिया निशान खड़े कर दिए हैं। जब वाहन महीनों से एक ही स्थान पर खड़े थे, तो उनके नाम पर ईंधन की फर्जी एंट्रियां कैसे पास होती रहीं और इसका सत्यापन किसने किया? फिलहाल, 15 दिनों के बाद आने वाली जांच रिपोर्ट के बाद ही यह स्पष्ट हो सकेगा कि इस घोटाले के पीछे कौन-कौन से चेहरे बेनकाब होते हैं और विभाग उन पर क्या कार्रवाई करता है।