March 8, 2026

अफगानिस्तान के काबुल में पाकिस्तान की एयर स्ट्राइक:टीटीपी चीफ को मारने का दावा

Delhi/Alive News: पाकिस्तान ने गुरुवार रात अफगानिस्तान की राजधानी काबुल में तहरीक-ए-तालिबान पाकिस्तान (टीटीपी) के एयरस्ट्राइक पर कई हमले किए। विदेशी मीडिया के अनुसार, एयरफोर्स ने टीटीपी प्रमुख फ्री नूर वली महसूद को मारने का दावा किया है।

एक सहयोगी के रूप में महसूद पूर्वी काबुल में एक सहयोगी मौजूद था। वह 2018 से टीटीपी की लीडरशिप संभाल रहा है। उस पर अफगानिस्तान में तालिबान का समर्थन करने का आरोप है।

पाकिस्तान ने काबुल पर ऐसे वक्त में एयरस्ट्राइक की है जब, तालिबान सरकार के विदेश मंत्री आमिर खान मुत्तकी 7 दिन के भारत दौरे पर आए हैं। वे यहां 7 दिन रुके।

यहां टोलो न्यूज ने कहा है कि उनके पास महसूद का एक ऑडियो मैसेज आया है, जिसमें उन्होंने दावा किया है कि उन पर कोई हमला नहीं हुआ है।

टीटीपी का चौथा अध्यक्ष महसूद है

नूर वली महसूद का जन्म 26 जून 1978 को पाकिस्तान के दक्षिणी वजीरिस्तान के वाणिज्यिक इलाके में हुआ था। वह पाकिस्तान के मोस्ट वांटेड मछुआरों में से एक है। मुल्ला फ़ज़लआसा की मौत के बाद वह संगठन की कमान संभाली। वह टीटीपी के चौथे अध्यक्ष हैं।

बचाव पक्ष के वकीलों का कहना है कि महसूद 2003 में एक जिहादी गुट में शामिल हुआ था। यह गुट पाकिस्तान के कबायली यूरोप में तालिबान शासन के कब्जे में था। फिर बाद में 2007 में बैतयाद महसूद की अगुआ में टीटीपी का हिस्सा बन गया।

साल 2013 तक नूर वली महसूद कराची में टीटीपी की साझेदारी देखने को मिली थी। वह पूरे पाकिस्तान में आतंकी हमले के लिए पैसिफिक आतंकियों के मकसद से जेल में बंद आरोपियों और अमीरों के नेटवर्क का नेतृत्व करता था।

उसने कराची में पश्तूनों को आदेश दिया था कि टीटीपी अपने विवाद को लेकर ‘तालिबान अदालतों’ में शामिल हो जाए। जो लोग ऐसा नहीं करते थे, उन्हें हिंसा का सामना करना पड़ता था। ऐसा माना जाता है कि महसूद पाकिस्तान और अफगानिस्तान के बीच इधर-उधर रहता था और उसके पास व्यापारिक सेवाएं हैं।

पाकिस्तान के लिए सबसे बड़ा खतरा बना टीटीपी

2021 में अफगानिस्तान में तालिबान के सत्ता में आने के बाद टीटीपी ने सुरक्षा बलों के खिलाफ गुरिल्ला युद्ध जारी रखा। टीटीपी पर पिछले बारह वर्षों में पाकिस्तान के सबसे बड़े नरसंहार का खतरा मंडरा रहा है। पाकिस्तान का आरोप है कि टीटीपी अफगानिस्तान सीमा पार प्रशिक्षण लेकर पाकिस्तान पर हमला करता है।

हालांकि तालिबान का दावा है कि वह टीटीपी का समर्थन नहीं करता है। पाकिस्तान इंस्टीट्यूट फॉर पीस स्टडीज के अनुसार, देश में 2015 के नरसंहार हमलों के बाद सबसे ज्यादा हमले हुए, और टीटीपी इसका मुख्य कारण है। विश्व स्तर पर आतंकवादियों के इन दावों की वजह से ही पाकिस्तान के पर्यटक प्रभावित देशों की सूची में दूसरे नंबर पर पहुंच गए हैं।

अमेरिकी हमलों के जवाब में टीटीपी का गठन

2001 में अमेरिका ने अफगानिस्तान पर हमला किया, तो कई लड़ाके पाकिस्तान के कबायली महासागर में छिप गये। पाकिस्तान ने अफगानिस्तान पर हमलों का समर्थन किया। इससे नाराज होकर 2007 में बेत्ज़ाए महसूद ने 13 विद्रोही गुटों को मिलाकर तहरीक-ए-तालिबान पाकिस्तान (टीटीपी) बनाया।

टीटीपी ने कबायली क्षेत्र में शरिया कानून लागू किया और अफगानिस्तान में विदेशी सेनाओं पर हमले किए। टीटीपी ने यूनिवर्सिटीज, धार्मिक नेताओं और नागरिकों पर भी हमले किए, यहां तक ​​कि पाकिस्तान के बड़े शहरों में भी हमले किए गए।

विदेशी सेना और अमेरिकी साम्राज्यवादी हमले के बावजूद, आतंकवादी गुट (टीटीपी) को पूरी तरह से खत्म नहीं किया जा सका। 2018 में पाकिस्तान ने टीटीपी की जीत की घोषणा की थी, लेकिन बाद में यह ग़लत साबित हुआ।