January 28, 2022

अंतरराष्ट्रीय युवा दिवस युवाओं का दिन…

बढ़ती बेरोजगारी होना चाहिए चिंता का विषय

राकेश शर्मा

युवा किसी भी देश की तरक्की और विकास में अहम भागीदारी निभाता है। इसमें कोई दोहराई नही है क्योंकि जो विजन, काम करने की शक्ति और कुछ नया करने का जज्बा युवाओं के पास है। वो किसी के पास नही हो सकता आज का दिन युवाओं का दिन है। 12 अगस्त अंतर्राष्ट्रीय युवा दिवस के रूप में मनाया जाता है, ताकि युवाओं की समस्या और उनके निवारण पर ज्यादा से ज्यादा विचार- विमर्श किया जा सके। आज का दिन युवाओं का दिन है लेकिन आज ही नहीं युवा पिछले काफी समय से हताश और परेशान भी है।

कहीं बेरोजगारी की समस्या तो कहीं रोजगार छिन जाने की समस्या के कारण युवा मानसिक और आर्थिक रूप से कमजोर हो रहे है। कोरोना काल में ही ना जाने कितने लोगों का रोजगार छिन गया, जिसमें सबसे ज्यादा भागीदारी युवाओं की थी। आज भी युवा उस महामारी से उबर नहीं सका और आलम यह है कि दिन-प्रतिदिन बेरोजगारी का दंश युवाओं की जवानी से लेकर उनके कार्य शक्ति को खत्म कर रहा है। हर रोज न जाने कितने युवा रोजगार ना मिलने के कारण अपनी जीवन लीला को समाप्त कर रहे हैं जैसा कि समय-समय पर आंकड़ों के माध्यम से जानकारियां सांझी की जाती है।

देश और प्रदेश की सरकारें आज केवल अंतरराष्ट्रीय युवा दिवस की हार्दिक बधाई और शुभकामनाएं देकर अपना पल्ला झाड़ने का काम कर रही हैं जैसा की पिछले कई वर्षो से होता आया है। आज के दिन युवाओं की समस्याओं पर चर्चाएं तो जरूर होंगे लेकिन उनके समाधान के लिए कोई कारगर कदम न उठाए जाने के कारण युवाओं को फिर उनके हालात पर ही छोड़ दिया जाएगा। युवाओं का इस्तेमाल केवल सत्ता पर आसीन होने का एक आसान सा रास्ता बनता जा रहा है और दिन प्रतिदिन बढ़ती बेरोजगारी जहां देश और प्रदेश के लिए चिंता का विषय होना चाहिए। वही राजनीतिक दलों की भी अपने अपने राज्यों की जनता के प्रति जवाबदेही का विषय होना चाहिए। ताकि युवाओं को एहसास हो सके कि आज का दिन केवल एक दिन मात्र ना बनकर उनकी समस्याओं के समाधान के लिए कठोर कदम उठाने का दिन है।

पढ़ा लिखा युवा आज एक शहर से दूसरे शहर में अपने सपनों को साकार करने के लिए दिनभर भटक रहा है, हाथों में डिग्रियां लेकर अपने सपनों को चूर- चूर होते हुए देख रहा है। पढ़ लिख कर देश की सेवा के लिए जो सपने युवाओं ने संजोए वह रोजगार ना मिलने के कारण टूटते जा रहे हैं। एक पद पाने के लिए हजारों युवाओं की लगी हुई लम्बी लम्बी लाईनो से ही अंदाजा लगाया जा सकता है कि किस प्रकार युवाओं को अपने और अपने परिवार के भविष्य की चिंता सता रही है।

कहीं ना कहीं इन युवाओं के जेहन में सवाल तो उठने स्वाभाविक है कि आजादी के इतने वर्ष बीत जाने के बाद भी राजनीतिक दलों ने देश के युवाओं के लिए क्या किया। आखिर क्यों उनको उनके ही हालात पर छोड़ दिया चुनावों में रोजगार की बात करने करने वाले राजनीतिक दलों ने क्या युवाओं के साथ विश्वासघात करने का काम किया। अपने आप को ठगा हुआ सा महसूस करने वाला युवा कहीं ना कहीं अपराध की दिशा में कदम बड़ा रहा है आलम ये है की हर रोज बढ़ रहे आपराधिक मामलों में युवाओं की संख्या भी दिन-प्रतिदिन बढ़ती जा रही है रोजगार न मिलना अपनी जरूरतों को पूरा करने के लिए युवा पीढ़ी इस अपराध की खाई में गिरता जा रहा है

समाज के आगे अपने आप को सफल ना कर पाना युवाओं को क्रोध और चिड़चिड़ापन का भी शिकार होना पड़ रहा है। यदि समय रहते इस समस्या का समाधान नहीं किया गया तो परिणाम और घातक हो सकते हैं इसलिए केवल एक दिन युवाओं की समस्याओं के समाधान और उनकी चर्चा करना सही नहीं है। देश का युवा हर रोज अपनी समस्याओं के समाधान, विचार विमर्श और रोजगार के साधन तलाशने की मांग को उठता रहा है ताकि युवा पीढ़ी को एहसास हो सके एक न एक दिन उनके सपने भी साकार होंगे उनकी उम्मीद बनी रहे और युवाओं की कार्य शक्ति, उनका विजन को देश की की तरक्की और विकास में काम आ सके।

(लेखक एक पत्रकार है, लेख में जो विचार है वह उनके निजी विचार है )

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