Faridabad/Alive News: दिवाली से एक दिन पहले मनाई जाने वाली छोटी दिवाली को नरक चतुर्दशी होती है। इस दिन गोबर के दीपक जलाने की मान्यता है कि गोबर का दीपक जलाने से नरक जाने का भय दूर होता है। इस दिन पापों के प्रतीक नरकासुर के नाश की कामना से चार ज्योत वाले दीप जलाए जाते है। इस दिन छोटी दीपावली 19 तारीख को मनाई जाएगी। छोटी दीपावली पर शाम को घर के बाहर चौमुखा दीप जलाने की परंपरा है। मान्यता है कि इसी दिन भगवान श्री कृष्ण ने नरकासुर का संहार किया था। इसलिए छोटी दिवाली को नरक चतुर्दशी के नाम से भी जाना जाता है। नदी घाटों पर नरक चतुर्दशी के दिन स्नान की प्राचीन मान्यता भी है।
क्यों मनाई जाती है छोटी दिवाली
छोटी दीपावली मनाने को लेकर कहा जाता है कि रति देव नाम के एक राजा थे। उन्होंने अपने जीवन में कभी कोई पाप नहीं किया था, लेकिन एक दिन उनके सामने यमदूत आ खड़े हो गए। जिसे देख राजा को अचंभा हुआ और उन्होंने कहा कि मैने तो कभी कोई पाप नहीं किया फिर भी क्या मुझे नरक जाना होगा। यह सुनकर यमदूत ने कहा कि एक बार आपके द्वार से एक ब्राह्मण भूखा लौट गया था, यह उसी पाप का फल है। यह सुनकर राजा ने प्रायश्चित करने के लिए यमदूतों में राजा के एक वर्ष का समय मांगा। यमदूतों में राजा को एक वर्ष का समय दे दिया। राजा ऋषियों के पास पहुंचे और उन्हें सारी कहानी सुनाकर अपनी इस दुविधा से मुक्ति का उपाय पूछा। तब ऋषि ने उन्हें बताया कि कार्तिक मास में कृष्ण पक्ष की चतुर्दशी का व्रत करें और ब्राह्मणों को भोजन कराएं।
क्यों कहा जाता है नरक चतुर्दशी को छोटी दीपावली?
छोटी दीपावली का पर्व धनतेरस के अगले दिन मनाया जाता है। यह पांच दिवसीय त्योहार का दूसरा दिन होता है और इसके अगले दिन दीपोत्सव मनाया जाता है। हिन्दू कैलेंडर के अनुसार नरक चतुर्दशी का पर्व कार्तिक मास के कृष्ण पक्ष की चतुर्दशी तिथि को मनाया जाता है। दरअसल नरक चतुर्दशी को छोटी दिवाली इसलिए कहा जाता है क्योकि यह दिवाली से एक दिन पूर्व मनाई जाती है। इस दिन भी घर में दीप जलाए जाते है। इस दिन मुख्य तौर पर 14 दीपक जलाने की परंपरा है।
छोटी दिवाली 2025 तिथि व मुहूर्त
छोटी दिवाली इस साल 19 अक्टूबर 2025 को मनाई जाएगी। चतुर्दशी तिथि का प्रारम्भ 19 अक्टूबर 2025 की दोपहर 1 बजकर 51 मिनट से होगा और इसका समापन 20 अक्टूबर 2025 की दोपहर 3 बजकर 44 मिनट पर होगा।
क्या है पूजा विधि
छोटी दिवाली के दिन सूर्योदय के समय तिल का तेल लगा कर स्नान करना चाहिए। ऐसा करने से भगवान कृष्ण की कृपा मिलती है। इस दिन हनुमान जी के साथ ही यम देवता की पूजा अर्चना भी की जाती है। सुबह स्नान करने के बाद चौकी पर लाल रंग का कपड़ा बिछा लें। इसके बाद उसपर हनुमान जी की मूर्ति की स्थापना करें। अब हनुमान चालीसा का पाठ करें और भगवान को हलवे का भोग लगाएं। इसके बाद भगवान कृष्ण की पूजा अर्चना करें, आरती करें। रात के समय घर के बाहर दक्षिण दिशा की तरफ मुंह करके यम देवता के नाम से एक दीपक जलाएं।

