Faridabad/Alive News: दीपावली के बाद भाई दूज का पावन पर्व बड़े धूम-धाम से मनाया जाता है। भाई दूज भाई-बहन के अटूट प्रेम, स्नेह और आपसी विश्वास का प्रतीक है। भाई दूज हर साल कार्तिक मास की शुक्ल पक्ष द्वितीया तिथि को मनाया जाता है। इस दिन बहनें अपने भाई के माथे पर तिलक करती हैं और उनकी लंबी उम्र, स्वास्थ्य और समृद्धि की कामना करती हैं। बदले में भाई अपनी बहन को उपहार देकर उनका सम्मान और प्यार जताते हैं। यह पर्व परिवार में भाई-बहन के रिश्तों को मजबूत करने का अवसर है।
कैसे मनाया जाता है भाई दूज?
भाई दूज के दिन बहनें सुबह स्नान करती हैं और व्रत रखती हैं। वे अपने भाइयों को घर बुलाकर पूजा की थाली सजाती हैं। फिर वे भाइयों के माथे पर घी का तिलक लगाती हैं, रक्षा सूत्र (धागा) बांधती हैं और आरती करती हैं। इसके बाद बहनें अपने भाइयों को मिठाई खिलाती हैं। बदले में, भाई अपनी बहनों को उपहार देते हैं और उनके सुख-समृद्धि की कामना करते हैं।
क्यों मनाया जाता है भाई दूज?
भाई दूज का त्योहार यमराज और उनकी बहन यमुना से जुड़ा हुआ है। कथा के अनुसार, इसी दिन यमराज अपनी बहन यमुना से मिलने उसके घर गए थे। यमुना अपने भाई को देखकर बहुत प्रसन्न हुईं। उन्होंने यमराज की आरती उतारी, उन्हें भोजन कराया और आदर-सत्कार किया। कहा जाता है कि तभी से भाई दूज का पर्व मनाने की परंपरा शुरू हुई, जो आज भी प्रेम और स्नेह के प्रतीक के रूप में मनाई जाती है।
भाई दूज की तिथि और समय
दूज 23 अक्टूबर 2025, गुरुवार को मनाया जाएगा। पंचांग के अनुसार भाई दूज की तिथि 22 अक्टूबर 2025 को रात 8 बजकर 16 मिनट से शुरू होकर 23 अक्टूबर 2025 को रात 10 बजकर 46 मिनट तक रहेगा।
क्या है शुभ मुहूर्त
तिलक का समय दोपहर 01 बजकर 13 मिनट से 03 बजकर 28 मिनट तक रहेगा और अवधि कुल 2 घंटे 15 मिनट तक की है।
भाई दूज पर इस मंत्र का करे जाप
भाई दूज पर बहन अपने भाई की लंबी उम्र, सुख-समृद्धि और सुरक्षा के लिए तिलक करते समय मंत्र का जाप कर सकती है। इस अवसर पर सबसे सरल और प्रभावशाली मंत्र है: “ॐ यमाय नमः”। इसके अलावा बहन उच्च स्वर में या मन ही मन कह सकती है: “ॐ स्वस्ति भद्राणि शुभानि, पूर्णं भवतु ते आयुष्मान्। दीर्घायुः।

