March 8, 2026

क्या है नवरात्रि में माता शैलपुत्री की पूजा की विधि, पढ़िए

Faridabad/Alive News: शारदीय नवरात्रि 2025 का शुभारंभ 22 सितंबर सोमवार से शुरू होगा। यह एक ऐसा पर्व होता है जब मां दुर्गा की नौ दिनों नौ रूपों में पूजा की जाती है। नवरात्रि का विशेष धार्मिक महत्व माना जाता है। इसकी शुरुआत आश्विन शुक्ल पक्ष की प्रतिपदा तिथि से होती है और समापन दशमी तिथि को होता है। शारदीय नवरात्रि के पहले दिन मां शैलपुत्री की पूजा की जाती है। मां शैलपुत्री को सौभाग्य की देवी भी कहा जाता है। मां शैलपुत्री की पूजा करने से भक्तों को सुख, समृद्धि और स्थिरता प्राप्त होती है।

शैलपुत्री का जन्म हिमाचल पर्वत में हुआ था और इसलिए उन्हें शैलपुत्री कहा जाता है। माता शैलपुत्री के नाम में शैल का अर्थ पर्वत होता है। शैलपुत्री के रूप को शक्ति, साहस और स्थिरता का प्रतीक भी माना जाता है। उन्हें उमा और हेमवती के नामों से भी जाना जाता है।

क्या है पूजा की विधि
मां शैलपुत्री की पूजा विधि में सबसे पहले पूजा स्थल पर गंगाजल छिड़ककर उसे शुद्ध करे बाद में चौकी पर लाल कपड़ा बिछाकर मां दुर्गा की प्रतिमा को स्थापित करें। पूजा के कलश में जल भरने के बाद उसके ऊपर आम के पत्ते रखकर नारियल रखे। कलश स्थापना करते समय मां दुर्गा को आमंत्रित करे। माता की प्रतिमा पर लाल वस्त्र, लाल फूल और श्रृंगार को अर्पित करे। दीप और धूप जलाकर माता की आरती करे साथ ही गोबर के उपले से अग्यारी देते समय घी, लोग, बताशे, कपूर की आहुति दे। माता को प्रसाद के रूप में फल और मिठाई और सात्विक चीजों का ही भोग लगवाए।

किस प्रसाद का लगाएं भोग
मां शैलपुत्री को गाय के दूध और घी से बनी चीजों का ही भोग लगाए साथ ही खुद भी प्रसाद के रूप में उसे ग्रहण करे।