March 8, 2026

सतयुग दर्शन वसुंधरा में त्रिदिवसीय आध्यात्मिक प्रशिक्षण शिविर का आयोजन

Faridabad/Alive News : भूपानी स्थित सतयुग दर्शन वसुंधरा परिसर में विश्व का प्रथम “समभाव समदृष्टि के स्कूल” द्वारा तीन दिवसीय आध्यात्मिक प्रशिक्षण शिविर का सफल आयोजन किया गया।

इस शिविर का मुख्य उद्देश्य आगामी दिनों में जालंधर, पंचकुला, अंबाला और मुरादाबाद में खुलने वाले समभाव – समदृष्टि के स्कूलों की रूपरेखा एवं उनके महत्व को साझा करना था।

शिविर के प्रमुख बिंदु इस प्रकार रहे
“समभाव समदृष्टि के स्कूल का अर्थ और महत्व”, “मन” की परिभाषा एवं मन को उपशम रखने की विधि”;, “संस्थान प्रमुख की भूमिकाएँ और जिम्मेदारियां”, “एक इंटरैक्टिव क्विज़ एवं प्रश्नोत्तरी के माध्यम से सतवस्तु”; विषय पर गहन जानकारी दी गई।

“परफेक्ट टीचर कैसे बनें” और “समभाव समदृष्टि की कक्षाओं में सही अनुशासन व सच्चे विद्यार्थी के गुण” पर चर्चा की गई। इसके अतिरिक्त शिविर के माध्यम से यह संदेश भी दिया गया कि शिक्षा केवल ज्ञानार्जन तक सीमित न होकर मानवता, अनुशासन और आत्मचिंतन के मूल्यों को भी समाज में स्थापित करने का माध्यम बने।

सबकी जानकारी हेतु बता दें कि फरीदाबाद, भूपानि ग्राम स्थित सतयुग दर्शन ट्रस्ट (रजि.) महाबीर सत्संग सभा का विस्तारित रूपांतरण है और इसका परिसर सतयुग दर्शन वसुन्धरा के नाम से प्रसिद्ध है।

सतयुग दर्शन वसुन्धरा पर स्थापित ध्यान-कक्ष यानि विश्व का प्रथम समभाव-समदृष्टि का स्कूल जिसका निर्माण सतवस्तु के कुदरती ग्रन्थ में विदित कुदरती कला के अनुसार हुआ है, उसकी दिव्यता को दृष्टिगत रखते हुए हरियाणा सरकार ने इसे “पावन दर्शनीय स्थल घोषित” कर दिया है। इसी तरह भारत सरकार ने भी इसे “अतुल्य भारत यानि इनक्रेडिबल इंडिया” के तहत् शामिल कर, इसको वास्तुकला की सुंदरता की अद्वितीय मिसाल माना है।

इतना ही नहीं, सबको बता दें कि यहाँ की प्रत्येक गतिविधि वैश्विक स्तर पर हर मानव को सतयुग की आद् संस्कृति से परिचित करा उसे पुन: मानवता का प्रतीक बनाने के निमित्त ही संचालित होती है ताकि आज का विषयग्रस्त मानव समय रहते ही मानवता का स्वाभिमान और सतयुग की पहचान बन अपनी आद् इलाही शान को प्राप्त हो, सजनता का प्रतीक बन सके। इसी के साथ एकता, एक अवस्था में स्थित रहते हुए निष्काम भाव से हर विध् कुदरती वेद-विहित् ज्ञान अनुसार, जगत कल्याण के निमित्त समर्पित हो, परोपकार प्रवृत्ति में ढल सके और निर्विकारिता से जीवन जीने के योग्य बन सके।

आपकी जानकारी हेतु कुदरत के हुक़्मानुसार जनहित के लिए भारत देश के कई शहरों में मानव को मानवता का पाठ पढ़ाने हेतु “समभाव-समदृष्टि” के स्कूल खोले जा रहे हैं जिसमें वहाँ के निष्काम शिक्षकों द्वारा नागरिकों को निशुल्क शिक्षा दी जाएगी। जिसमें किसी भी आयु वर्ग का, किसी भी जाति का कोई भी व्यक्ति आ सकता है और एक अच्छा आध्यात्मिक ज्ञान से भरपूर नागरिक बनकर खुद को, परिवार को व समाज को नई दिशा दे सकता है।

इसी उद्देश्य की सिद्धि हेतु सतयुग दर्शन वसुंधरा से हर सजन को मानवता का प्रतीक बनाने हेतु प्रतिवर्ष राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अन्य कई कार्यक्रम भी चल रहे हैं। इन कार्यक्रमों का मुख्य उद्देश्य है कि आज के समय काल में मानसिक रूप से संतप्त हर मानव पुन: शांति शक्ति का प्रतीक बन सके। उसके लिए मानवता-ई-ओलमपियाड, Spiritual Eloquence, Spiritual Echoes, संगीत एवं कला की भिन्न – भिन्न प्रतियोगिताओं द्वारा हर मानव को भाव-स्वभाव परिवर्तित करने के लिए उत्साहित किया जा रहा है ताकि वह भ्रष्टाचारिता, दुराचारिता, व्यभिचारिता के स्वभाव से ऊपर उठ, पुन: सदाचारिता का प्रतीक बन, यथार्थ रूप से मानवता की पहचान बने।

ज्ञात हो जहाँ इन गतिविधियों का लक्ष्य आत्मज्ञान के सद्प्रभाव से हर मानव के मन-मस्तिष्क को स्थिर रखते हुए, परिवारों में एकता व शांति का वातावरण का निर्माण करना है, वही वैश्विक स्तर पर हर मानव के मन को वसुधैव कुटुम्बकम्ब के भाव से भी सींचना है। याद रखो ऐसा भाव स्वाभाविक परिवर्तन होने पर ही हर मानव सतयुग की संस्कृति को अपनाने के योग्य बन, जीवन में हर क्षण सत्य धर्म पर टिका रह सकता है व यश कमा सकता है।

अत: इस भाव-स्वाभाविक परिवर्तन के खेल को समझते हुए हमारे लिए भी बनता है कि हम सतयुग दर्शन ट्रस्ट की इन गतिविधियों से जुड कर लाभान्वित हो और सजनता का प्रतीक बनें। आपकी जानकारी हेतु आप इस हेतु प्ले स्टोर पर जाकर, सतयुग दर्शन ट्रस्ट की ऐप डाउनलोड कर सकते हैं व सहज ही सतयुगी संस्कृति अपना जीवन सार्थक करने का शुभारंभ कर सकते हैं।