March 7, 2026

सनातन राष्ट्र शंखनाद महोत्सव’ में गूंजेगा शौर्य का शंखनाद

Faridabad/Alive News : नई दिल्ली के भारत मंडपम (इंद्रप्रस्थ) में 13 से 15 दिसंबर तक आयोजित होने वाले ‘सनातन राष्ट्र शंखनाद महोत्सव’ में छत्रपति शिवाजी महाराज के काल के 250 से अधिक दुर्लभ व ऐतिहासिक शस्त्रों का अनोखा प्रदर्शन किया जाएगा। महाराष्ट्र से विशेष सुरक्षा व्यवस्था के तहत लाए जा रहे इन शस्त्रों का यह राजधानी में पहला भव्य प्रदर्शन होगा। महोत्सव का आयोजन सनातन संस्था द्वारा तथा प्रस्तुति सेव कल्चर, सेव भारत फाउंडेशन द्वारा की जा रही है। सनातन संस्था के राष्ट्रीय प्रवक्ता अभय वर्तक के अनुसार, इस प्रदर्शनी के माध्यम से दिल्ली से पूरे देश में शौर्य का संदेश प्रसारित होगा।

स्वराज्य का शौर्यनाद’ प्रदर्शनी मुख्य आकर्षण

संस्था के रजत महोत्सवी वर्ष के उपलक्ष्य में आयोजित तीन दिवसीय इस कार्यक्रम में ‘स्वराज्य का शौर्यनाद’ शीर्षक से विशाल प्रदर्शनी लगाई जाएगी। हॉल नंबर 12 में सर्वसामान्य के लिए खुली इस प्रदर्शनी में शिवाजी महाराज द्वारा उपयोग किए गए शस्त्रों के साथ-साथ मराठा साम्राज्य के प्रमुख सेनानायकों के शस्त्र भी प्रदर्शित होंगे। इनमें सरसेनापति हंबीरराव मोहिते का भाला विशेष आकर्षण रहेगा।

प्रदर्शनी में महाराणा प्रताप के काल के शस्त्र, विजयनगर साम्राज्य की तलवारें, शिवकालीन युद्धपरंपराए, धातुशास्त्र, लोहे से शस्त्र निर्माण की मराठा प्रक्रिया तथा सामरिक कुशलता से जुड़े विभिन्न तत्व शामिल किए जा रहे हैं।

इसके अतिरिक्त आत्मरक्षा में उपयोग होने वाले हिंदू महिलाओं के शस्त्र भी प्रदर्शित होंगे, जो उस काल की स्त्रियों के साहस और रणकौशल का सजीव चित्र प्रस्तुत करेंगे।

संत, महंत और कई वरिष्ठ नेता होंगे उपस्थिति

महोत्सव में श्रीराम जन्मभूमि तीर्थक्षेत्र न्यास के कोषाध्यक्ष पू. स्वामी गोविंददेवगिरी महाराज, केंद्रीय पर्यटन एवं संस्कृति मंत्री गजेंद्र सिंह शेखावत, केंद्रीय रक्षा राज्य मंत्री संजय सेठ, दिल्ली के संस्कृति मंत्री कपिल मिश्रा, शिवाजी महाराज के वंशज सांसद उदयनराजे भोसले, अधिवक्ता विष्णु जैन समेत कई संत-महंत और गणमान्य अतिथि उपस्थित रहेंगे।

राष्ट्ररक्षा और विरासत के पुनरुद्धार का प्रतीक

सनातन राष्ट्र शंखनाद महोत्सव’ को राष्ट्ररक्षा, संस्कृति, शौर्य और हिंदवी स्वराज्य की गौरवशाली परंपरा के पुनरुद्धार का प्रतीक बताया जा रहा है। आयोजकों के अनुसार, शिवकालीन शस्त्र और युद्धकला की यह स्मृति आज के युवाओं में राष्ट्रधर्म और सुरक्षा जागरूकता की नई चेतना उत्पन्न करेगी।