March 7, 2026

उपनिदेशक ने फसलों को होने वाले नुकसान के लिए किसानों को किया सर्तक

Faridabad/Alive News: जिला कृषि एवं किसान कल्याण विभाग के उपनिदेशक डॉ. बाबू लाल ने शीतलहर और पाले से फसलों को होने वाले नुकसान को लेकर किसानों को सतर्क किया है। उन्होंने कहा कि अत्यधिक ठंड के कारण फसलों में काली रतुआ, सफेद रतुआ, लेट ब्लाइट जैसी गंभीर बीमारियां फैलने की आशंका बढ़ जाती है, जिससे अंकुरण, वृद्धि, पुष्पण, उपज और भंडारण क्षमता पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ता है।

डॉ. बाबू लाल ने बताया कि शीतलहर फसलों की समग्र उत्पादकता को गंभीर रूप से प्रभावित करती है, इसलिए इससे बचाव के लिए समय पर उचित प्रबंधन अत्यंत आवश्यक है। उन्होंने किसानों को सलाह दी कि बोर्डो मिश्रण या कॉपर ऑक्सीक्लोराइड के साथ फास्फोरस व पोटाश का छिड़काव करने से जड़ों का बेहतर विकास होता है और फसल की सहनशीलता बढ़ती है।

उन्होंने कहा कि शीतलहर के दौरान हल्की एवं बार-बार सतही सिंचाई लाभकारी होती है, वहीं जहां संभव हो स्प्रिंकलर सिंचाई का प्रयोग करना चाहिए। ठंड एवं पाला प्रतिरोधी किस्मों की खेती अपनाने पर भी उन्होंने जोर दिया।

बागवानी एवं सब्जी उत्पादन से जुड़े किसानों को सलाह देते हुए डॉ. बाबू लाल ने अंतर फसली खेती, मिश्रित सब्जी खेती तथा सरसों और अरहर जैसी लंबी फसलों की बुवाई करने की बात कही, जिससे ठंडी हवाओं से फसलों को प्राकृतिक सुरक्षा मिलती है। इसके अलावा नर्सरी एवं छोटे पौधों को प्लास्टिक शीट, पुआल या सरकंडा घास की छप्पर से ढकने, जैविक मल्चिंग अपनाने तथा हवा की गति कम करने के लिए विंड ब्रेक या आश्रय बेल्ट लगाने की भी सिफारिश की।

उन्होंने कहा कि यदि किसान समय रहते इन उपायों को अपनाएं, तो शीतलहर और पाले से होने वाले नुकसान को काफी हद तक कम किया जा सकता है और फसल उत्पादन सुरक्षित रखा जा सकता है।