March 7, 2026

धर्म, साहस और समानता का प्रतीक है गुरु गोविंद सिंह जी की जयंती

Faridabad/Alive News: सवा लाख से एक लड़ाऊं, चिड़ियन ते मैं बाज तुड़ाऊं, तबै गुरु गोबिंद सिंह नाम कहाऊं! सिखों के दसवें गुरु गुरु गोविंद सिंह जो न केवल एक आध्यात्मिक गुरू बल्कि एक निडर योद्धा, कवि और दार्शनिक भी थे। जिन्होने अपने चारों पुत्र धर्म की रक्षा के लिए कुर्बान किये थे। उनके साहस के आगे मुगल की सेना भी थर-थर कांप गई थी। हर साल गुरु गोविंद सिंह जी के साहस और बलिदान को याद करने के लिए गुरुद्वारों में गुरु गोविंद सिंह जी की जयंती मनाई जाती है।

यह दिन सिख समाज ही नहीं, बल्कि पूरे देश के लिए त्याग, वीरता और मानवता का संदेश देता है। गुरु गोविंद सिंह जी का जन्म 22 दिसंबर 1666 को पटना साहिब (बिहार) में हुआ था।
गुरु गोविंद सिंह जी की जयंती इसलिए भी मनाई जाती है क्योंकि उन्होंने सिख धर्म को एक नई दिशा दी और समाज को अन्याय, अत्याचार और भेदभाव के खिलाफ खड़े होने के लिए प्रेरित किया।

खालसा पंथ की स्थापना
गुरु गोविंद सिंह जी का सबसे बड़ा योगदान 1699 में खालसा पंथ की स्थापना माना जाता है। उन्होंने सिखों को पांच ककार धारण करने का आदेश दिया और उन्हें संत-सिपाही बनने का संदेश दिया। खालसा पंथ का उद्देश्य धर्म की रक्षा और अत्याचार का विरोध करना था।

समानता और निडरता का संदेश
गुरु गोविंद सिंह जी ने जाति-भेद, ऊंच-नीच और डर को समाप्त करने का संदेश दिया। उन्होंने सिखों को सिखाया कि अन्याय के सामने झुकना पाप है और सत्य के लिए संघर्ष करना ही सच्चा धर्म है।

धर्म की रक्षा के लिए कुर्बान किए 4 पुत्र
गुरु गोबिंद सिंह जी के 4 पुत्र थे। उनका नाम साहिबजादे अजीत सिंह, साहिबजादे जुझार सिंह, साहिबजादे फतेह सिंह, साहिबजादे जोरावर सिंह था। उन्होंने अपने चारों पुत्र धर्म की रक्षा के लिए कुर्बान किए थे। गुरु गोबिंद सिंह जी ने अपने जीवन में आनंदपुर, भंगानी, नंदौन, गुलेर, निर्मोहगढ, बसोली, चमकोर, सरसा और मुक्तसर सहित 14 युद्ध किए थे। इन जंग में पहाड़ी राजाओं और मुगल सूबेदारों ने हर बार मुंह की खाई थी।

साहित्य और धार्मिक योगदान
उन्होंने दसम ग्रंथ की रचना की और सिखों को यह संदेश दिया कि गुरु ग्रंथ साहिब ही अंतिम और शाश्वत गुरु होंगे। इससे सिख धर्म में गुरु परंपरा को स्थायी स्वरूप मिला।

देशभर में आयोजन
गुरु गोविंद सिंह जी की जयंती पर गुरुद्वारों में अखंड पाठ, नगर कीर्तन, कीर्तन दरबार और लंगर का आयोजन किया जाता है। श्रद्धालु उनके बताए मार्ग पर चलने का संकल्प लेते हैं।

प्रेरणा का दिवस
गुरु गोविंद सिंह जी की जयंती केवल एक धार्मिक पर्व नहीं, बल्कि साहस, आत्मसम्मान और मानवता की रक्षा का प्रतीक दिवस है। उनका जीवन आज भी युवाओं को निडर होकर सत्य और न्याय के मार्ग पर चलने की प्रेरणा देता है।