Faridabad/Alive News: दशहरे पर जलाए जाने वाले रावण, मेघनाथ और कुंभकरण के पुतले बनाने वाले कारीगरों की मेहनत इस बार बारिश ने धो डाली। कन्नौज से आए सुनील पिछले पांच साल से अपने परिवार के साथ फरीदाबाद के नीलम चौक पर आकर पुतले बनाते हैं और बेचते हैं। उनका कहना था कि इस बार बारिश ने उनकी सारी मेहनत पर पानी फेर दिया।
सुनील ने बताया, “इस बार भले ही मुनाफा ना हो, बस जितनी लागत लगी है उतना ही निकल आए तो ऊपर वाले का शुक्रगुजार रहूंगा।”
इसी तरह कन्नौज से आई कारीगर शिला, रूबी और पिंटू ने अपनी व्यथा सुनाई। उन्होंने बताया कि मंगलवार को हुई बारिश ने बड़ा नुकसान किया है। बारिश से पुतले भीगकर खराब हो गए। कई पुतले चोरी भी हो गए, जिससे उनका नुकसान और बढ़ गया।
कारीगरों का कहना है कि वे हर साल दो जूं की रोटी के लिए कन्नौज से आते हैं, लेकिन इस बार हालात अलग बन गये। उनका कहना है कि ग्राहक भी बहुत मोलभाव कर रहे हैं, जिननी रकम इस बार लगाई उतनी रकम वापिस नहीं मिली।
एक कारीगर ने कहा, “हम लोग 5 साल से आ रहे हैं, हमेशा काफी फायदा हो जाता था, लेकिन इस बार हालात बहुत खराब हो गये हैं। बस भगवान से यही दुआ है कि जितना लगाया है उतना ही मिल जाए।”
इस बार दशहरा भले ही धूमधाम से मनाया गया, लेकिन पुतला बनाने वाले कारीगरों के लिए घाटे का ही दशहरा रहा है।

