March 8, 2026

चिराग योजना के तहत सत्र 2026–27 की प्रवेश प्रक्रिया शुरू

Faridabad/Alive News: हरियाणा सरकार की चिराग योजना के अंतर्गत सत्र 2026–27 के लिए प्रवेश प्रक्रिया शुरू हो गई है। मौलिक शिक्षा निदेशालय ने 28 जनवरी को सभी जिला शिक्षा अधिकारियों को इस संबंध में आदेश जारी किए हैं। योजना के तहत आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग के पात्र विद्यार्थियों को मान्यता प्राप्त निजी स्कूलों में निःशुल्क शिक्षा दी जाएगी, जिसकी पूरी फीस राज्य सरकार वहन करेगी। इस योजना का उद्देश्य सरकारी स्कूलों में पढ़ रहे ईडब्लयूएस वर्ग के विद्यार्थियों को निजी स्कूलों में अध्ययन का अवसर प्रदान करना है।

हालांकि, हरियाणा अभिभावक एकता मंच ने चिराग योजना को भ्रामक बताते हुए इसे गरीब बच्चों के साथ छलावा करार दिया है। मंच के प्रदेश अध्यक्ष एडवोकेट ओपी शर्मा और प्रदेश महासचिव कैलाश शर्मा ने आरोप लगाया कि सरकार आरटीई कानून को कमजोर करने और उसे प्रभावी रूप से लागू न करने की नीयत से चिराग योजना लेकर आई है।

मंच का कहना है कि इस योजना को न तो निजी स्कूल, विशेषकर सीबीएसई स्कूल, और न ही सरकारी स्कूलों में पढ़ने वाले विद्यार्थी स्वीकार कर रहे हैं। फरीदाबाद जिले में किसी भी सीबीएसई स्कूल का इस योजना से न जुड़ना इसका उदाहरण है। हरियाणा बोर्ड के केवल चार स्कूल एनबीएम मोहना, हैप्पी पब्लिक स्कूल सेक्टर-51, इकरा स्कूल बढ़खल और गांधी मेमोरियल स्कूल ही योजना से जुड़े हैं।

अभिभावक मंच का यह भी कहना है कि सरकारी स्कूलों के विद्यार्थी चिराग योजना के बजाय शिक्षा अधिकार कानून (RTE) के तहत निजी स्कूलों में आरक्षित 25 प्रतिशत सीटों पर प्रवेश चाहते हैं, लेकिन सरकार इस दिशा में गंभीर नहीं है। मंच ने आरोप लगाया कि जो निजी स्कूल आरटीई कानून का पालन नहीं कर रहे हैं, उनके खिलाफ भी सरकार कोई ठोस कार्रवाई नहीं कर रही।

बताया गया कि शिक्षा सत्र 2025–26 में फरीदाबाद के 28 सीबीएसई स्कूलों ने शिक्षा विभाग द्वारा चिन्हित विद्यार्थियों को आरटीई के तहत प्रवेश देने से इनकार कर दिया था। इस संबंध में जिला शिक्षा अधिकारी ने दो बार शिक्षा निदेशक, पंचकूला को शिकायत भेजकर संबंधित स्कूलों की एनओसी वापस लेकर मान्यता रद्द करने की सिफारिश की थी, लेकिन छह महीने बीतने के बावजूद कोई कार्रवाई नहीं की गई।

इस मामले को लेकर मंच के राष्ट्रीय सलाहकार और सुप्रीम कोर्ट के वरिष्ठ अधिवक्ता अशोक अग्रवाल ने मुख्यमंत्री और मुख्य सचिव को पत्र व दो लीगल नोटिस भेजकर जानकारी मांगी, लेकिन अब तक कोई जवाब नहीं मिला है। ऐसे में अशोक अग्रवाल द्वारा पंजाब एवं हरियाणा उच्च न्यायालय में याचिका दायर करने की तैयारी की जा रही है।